
अफीम की खुशबू ले गई हवालात की कोठरी
केस एक :- सात अप्रेल को महाजन पुलिस ने जैतपुर निवासी सद्दाम हुसैन के डाबला सड़क मार्ग स्थित पर खेत में गेहूं की फसल की आड़ में अफीम की खेती कर रखी थी। पुलिस ने यहां से 1020 पौधे जब्त किए। खेत मालिक सद्दाम हुसैन व श्रीगंगानगर के ठुकराणा निवासी काश्तकार अकरम खां को गिरफ्तार किया।
केस दो :- 15 अप्रेल को दंतौर पुलिस ने चक १७ बीएलडी स्थित एक खेत में दबिश देकर अफीम के 640 पौधे जब्त किए। काश्तकार को गोरासिंह को गिरफ्तार किया। आरोपी गेहूं की फसल की आड़ में अफीम की खेती कर रहा था।
बीकानेर। जिले में 90 फीसदी अपराधों का लॉकडाउन है। चोरी, नकबजनी, मारपीट जैसे छिटपुट मामले जरूर एकाध सामने आए हैं। इसके अलावा मादक पदार्थों से जुड़े मामले लगातार आ रहे हैं। जिला पुलिस करीब पौने दो महीने में अवैध रूप से अफीम खेती के पांच मामलों का पर्दाफाश कर 2830 पौधे जब्त कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। अफीम की खेती करने वालों को इसकी खुशबू ही पुलिस के धक्के चढ़ा रही है। इन दिनों सब कुछ बंद है। ऐसे में अफीम की महक के कारण पुलिस मुखबिरी तंत्र के माध्यम से इन खेतों तक पहुंच रही है।
जिले के पांचू और दंतौर थाना पुलिस ने भी अफीम की खेती पकड़ी थी। यह दोनों कार्रवाई लॉकडाउन से पहले की है। पांचू पुलिस ने सात फरवरी को जांगलू गांव में तुलसीराम ने खेत में जीरे की फसल के बीच अफीम के पौधे उगा रखे थे। पुलिस ने खेत से ७७० अफीम के पौधे जब्त किए थे। इसी प्रकार सैरुणा पुलिस ने २९ फरवरी को सावंतसर गांवं में प्याज की फसल की आड़ में अफीम की खेती का पर्दाफाश किया था। पुलिस ने ४०० पौधे जब्त किए और खेत मालिक ओमप्रकाश बिश्नोई को पकड़ा।
जिले में पहली कार्रवाई पांचू में पांचवीं दंतौर में
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जिले में डोडा-पोस्त, शराब व अफीम तस्करी करने वाले पकड़े जाते है और माल भी बरामद होता है लेकिन अफीम की खेती पकडऩे की कार्रवाई ढाई महीने पहले पांचू में पहली कार्रवाई की गई थी। इसके बाद महाजन और अब दंतौर थाना क्षेत्र में एक-एक कार्रवाई की जा चुकी है।
मुनाफे का लालच, जोखिम उठा रहे ज्यादा
अफीम की खेती कर अधिक मुनाफा कमाने के लालच में तस्कर जोखिम ज्यादा उठा रहे हैं। बताते हैं कि अफीम की खेती में लागत कम आती है। फसल पूरी तैयार होने के बाद बेचने पर मुनाफा अधिक मिलता है। अफीम के एक पौधे से करीब 15-20 ग्राम दूध प्राप्त होता है। अफीम के पौधों से अफीम, अफीम का दूध और तने व पत्तों से डोडा-पोस्त बनता है। यह बाजार में बेहद महंगे दामों पर बिकता है। इसकी खेती में ज्यादा लागत नहीं आती लेकिन जोखिम ज्यादा होता है। इसकी खेती प्रतिबंधित है। खेती करने के लिए लाइसेंस लेना होता है। अफीम की खेती चितौउगढ़़ क्षेत्र में अधिक होती है।
Published on:
17 Apr 2020 12:45 pm

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