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महंगाई की मार के बीच दूध के गिरे भाव ने तोड़ी पशुपालकों की कमर

देश की अर्थव्यवस्था में रीढ़ माने जाने वाले किसान और पशुपालक को पूर्ण लाभ नहीं मिलने से कार्य के प्रति मोह भंग होने लगा है।

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Milk prices fell

दूध के भाव गिरे

पशु चारा महंगा, नहीं मिल रहे दूध के भाव

भैराराम तर्ड/सुरनाणा. एक ओर सरकार किसानों और पशुपालकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राहत देने का दावा करती है। दूसरी और देश की अर्थव्यवस्था में रीढ़ माने जाने वाले किसान और पशुपालक को पूर्ण लाभ नहीं मिलने से कार्य के प्रति मोह भंग होने लगा है।

बढ़ती महंगाई के बीच पशुपालन को पशुपालक घाटे का सौदा मानने लगे हैं। इसका कारण है कि पशु आहार प्रति क्विंटल दो हजार रुपए और चारा पांच सौ से छह सौ रुपए की दर से खरीदने को विवश पशुपालक पानी से भी सस्ती दर पर दूध बेचने को मजबूर हैं।

जहां पानी की बोतल की कीमत बीस रुपए प्रति लीटर है। वहीं उरमूल डेयरी दुग्ध उत्पादक समिति में दूध के भाव महज पन्द्रह से सत्रह रुपए प्रति लीटर है। क्षेत्र में कई प्राइवेट डेयरियां भी दूध की खरीद करती है लेकिन उनके भाव भी पन्द्रह रुपए से कम है। कुछ डेयरियां तो अब आगे मांग नहीं है कहकर दूध खरीदने से भी मना कर रही है। ऐसे में किसानों और पशुपालकों के चेहरे का रंग उडऩे लगा है।

महंगाई की मार के बीच दूध के भाव की गिरावट पशुपालकों के लिए कोढ़ में खाज साबित हो रही है। पशुपालक लूणाराम गोदारा ने बताया कि दूध के भावों में बढ़ोत्तरी नहीं हुई तो पशुओं को रखना मुश्किल होगा। पशुपालक गोपीराम भुंवाल ने कहा कि चारे के भाव और अन्य लागत के हिसाब से दूध का नहीं बिकना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

आगे मांग कम
बीकानेर उरमूल दुग्ध डेयरी में प्रतिदिन एक लाख दो हजार लीटर दुग्ध की आवक है लेकिन इनमें से 40 हजार लीटर दुग्ध बाजार में बिकता है तथा शेष 60 हजार लीटर दुग्ध का पाउडर बन रहा है। इसकी आगे मांग नही होने से दुग्ध के भावों में गिरावट आई है।
एस.के. चोपड़ा एमडी, उरमूल दुग्ध डेयरी बीकानेर