
ramlal
टोंक जिले के अपने गांव चौगाई से तेरह वर्ष पूर्व बिछड़े रामलाल (55) को आखिरकार अपना परिवार मिल गया। माध्यम बना नोखा का अपनाघर आश्रम।
तेरह वर्ष पूर्व रामलाल अपने गांव के पास डिग्गी कस्बे में आयोजित समाज के एक सामूहिक सम्मेलन में भाग लिया लेकिन इसके बाद घर नहीं लौटा। परिवारजनों ने बहुत तलाश की लेकिन रामलाल कहीं नहीं मिला।
अन्त में चौगाई पुलिस चौकी में परिवारजनों ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। करीब चार वर्ष पूर्व बीकानेर रेलवे स्टेशन पर रामलाल मनोरोगी व घायल अवस्था में मिला। उसे अपनाघर आश्रम बीकानेर में भर्ती किया गया।
वहां से उसको इलाज के लिए भरतपुर आश्रम स्थानान्तरित किया गया। भरतपुर में उपचार के बाद सामान्य होने पर उसे वापस बीकानेर अपनाघर भेज दिया गया। नोखा में आश्रम खुलने पर रामलाल को नोखा स्थानान्तरित किया गया।
नोखा में करीब सात महीने रहने के बाद उसने दो दिन पूर्व सेवाकर्मी सोनू को अपने घर जाने की इच्छा जताते हुए अपना पता बताया। सोनू ने तत्काल कार्यालय प्रभारी तेजकरण सारस्वत को इसकी सूचना दी।
कार्यालय प्रभारी ने अपनाघर आश्रम के सचिव, अध्यक्ष व पुलिस थाना टोंक को इतिला दी। टोंक थाने ने चौगाई पुलिस चौकी को सूचना भिजवाई। आखिरकार रामलाल के परिवारजनों से सम्पर्क हो गया।
बुधवार को सुबह रामलाल के भाई लक्ष्मणराम व रामजीवन अपने परिवारजनों व रिश्तेदारों के साथ नोखा के अपनाघर आश्रम पहुंचे।
आश्रम में अपने भाई रामलाल को देखकर परिवारजनों व रिश्तेदारों की आंखें भर आई। खुशी में रामलाल की आंखों से भी आंसू छलक पड़े।
रामलाल के भाईयों ने संस्था सचिव ओमप्रकाश मूंधड़ा, कार्यालय प्रभारी तेजकरण सारस्वत व सेवाकॢमयों का आभार व्यक्त करते हुए रामलाल को अपने साथ ले गए।
Published on:
26 Aug 2016 12:41 am
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