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बीकानेर सहित 7 जिलों के सांपों के जहर पर होगा शोध, बनेगी दवा

बीकानेर सहित प्रदेश के सात जिलों में वाइपर प्रजाति के सांपों के जहर पर शोध किया जाएगा।

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रमेश बिस्सा/बीकानेर. बीकानेर सहित प्रदेश के सात जिलों में वाइपर प्रजाति के सांपों के जहर पर शोध किया जाएगा। राज्य सरकार ने हैदराबाद के कोशिकीय एवं अणविक जीव विज्ञान केन्द्र (सेन्टर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, सीसीएमबी) को सांपों का जहर निकालने की एक साल के लिए अनुमति दी है। केन्द्र की टीम सांपों के जहर खासकर वाइपर प्रजातियों के सांपों के विष को निकालकर एकत्र करेगी।

केन्द्र में इस शोध किया जाएगा और उससे एन्टी वेनम (जहर का असर कम करने में सक्षम) दवा तैयार करेगा। सीसीएमबी प्रदेश में सितंबर से अगले साल अगस्त तक सांपों का जहर निकालने का काम करेगा। सीसीएमबी की टीम वन विभाग की देखरेख में जहर निकालने का काम करेगी।

अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जीवी रेड्डी ने बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, राजसमंद, माउण्ट आबू के उप वन संरक्षकों को पत्र लिखकर इस कार्य के लिए तिथियां निर्धारित कार्यक्रम भेजा है। बीकानेर में यह कार्य अगले वर्ष 1 से 31 अगस्त तक होगा। इस दौरान सीसीएमबी टीम बीकानेर में जोड़बीड व अन्य क्षेत्रों में वाइपर प्रजाति के सांपों के जहर निकालेगी। उप वन संरक्षक (वन्यजीव) की निगरानी में जहर निकाला जाएगा।

इन तिथियों में होगा काम
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के आदेशानुसार सबसे पहले डूंगरपुर एवं बांसवाड़ा में संबंधित उप वन संरक्षक की निगरानी में इस साल एक से 31 सितंबर तक, राजसमंद एवं माउण्ट आबू में एक से ३० नवंबर व अगले साल एक मार्च से 31 मई तक, जोधपुर एवं जैसलमेर में भी अगले साल एक जून से ३१ जुलाई तक यह कार्य चलेगा। बीकानेर में अगले साल ही एक से ३१ अगस्त तक
सांपों का जहर निकालकर एकत्र किया जाएगा।

ये शर्तें रहेंगी
संबंधित जिलों में उप वन संरक्षक, उनके प्रतिनिधि की उपस्थिति में ही सांपों को पकड़ा एवं छोड़ा जा सकेगा। रोजाना एकत्र होने वाले जहर की मात्रा का ब्योरा उप वन संरक्षक को देना होगा। जहर को जिले से बाहर ले जाने से पहले उप वन संरक्षक (वन्यजीव) से पारपत्र (टीपी) लेना होगा। पारपत्र में अंकित अवधि एवं मात्रा अधिक पाए जाने पर वन्यजीव अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा।

मिले हैं निर्देश
सांपों का जहर निकालने के लिए कार्यक्रम जारी हुआ है। इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से निर्देश मिले हैं। यह कार्य विभाग की देखरेख में निर्धारित नियम व शर्तों के आधार पर ही कराया जाएगा।
जयदीप सिंह राठौड़, उपवन संरक्षक (वन्यजीव), बीकानेर

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