राजस्थानी की मान्यता के लिए निकाला पैदल मार्च

मायड़ भाषा दिवस पर राजस्थानी को मान्यता और राजभाषा का दर्जा दिए जाने की रखी मांग

 

By: Vimal

Published: 22 Feb 2021, 07:03 PM IST

बीकानेर. अन्तरराष्ट्री मातृभाषा दिवस पर रविवार को राजस्थानी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और राजस्थान में दूसरी राजभाषा का दर्जा दिए जाने की मांग रखी गई। राजस्थानी मोट्यार परिषद, मान्यता संघर्ष समिति, राजस्थानी जनमंच और युवा मोर्चा के संयुक्त नेतृत्व में गांधी पार्क से कचहरी तक पैदल मार्च निकाला गया। इस मार्च में विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए। पैदल मार्च के कलक्ट्रेट पहुंचने पर केन्द्र और राज्य सरकार के नाम ज्ञापन एडीएम सिटी को सौंपा गया।


बीकानेर संभाग अध्यक्ष डॉ. हरिराम बिश्नोई ने कहा कि केंद्र सरकार संविधान की आठवीं अनुसूची में राजस्थानी को शामिल कर राजस्थान प्रदेश के मान सम्मान को उचित स्थान प्रदान करावें। प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. गौरीशंकर प्रजापत ने कहा कि राजस्थानी की उपेक्षा करोड़ो युवाओं पर कुठाराघात है।


परिषद् के सलाहकार डॉ. नमामिशंकर आचार्य ने कहा कि राजस्थान सरकार राजस्थानी को राजभाषा घोषित करें। डूंगर कॉलेज राजस्थानी विभागाध्यक्ष प्रकाश अमरावत ने कहा कि राजस्थान में ही राजस्थानी को महत्व नही मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रदेश महामंत्री सरजीत सिंह के अनुसार मातृभाषा दिवस पर प्रदेश के जिलो में जिला कलेक्टर मुख्यालय पर राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए केंद्र और राज्य सरकार को ज्ञापन भेजे गए।


सभा को राजेन्द्र सिंह, प्रशांत जैन, राजेश चौधरी, मुकेश रामावत, सरजीत सिंह, रामावतार, भरत दान चारण, श्याम सुंदर, जुगल किशोर पुरोहित, किशन चंद्र आदि ने संबोधित किया। सभा व पैदल मार्च में नारायण प्रजापत, करण चौधरी, ग्रवीत राज, अजय कंवर, अनु, भावना, शारदा, प्रीति, दीनदयाल उपाध्याय, बहादुर सियाग, सुनील सांखला, कृष्ण चन्द्र पुरोहित, श्याम सुंदर किराडू, लक्ष्मीनारायण धारणिया, आमीन खान नागरा, मोहन लाल गेधर, नेमचन्द खुडय़िा, अजीम खान, नीरज, हिमांशु टाक, सेणी दान, मुकेश बिट्टू, वासुदेव, देवीसिंह आढा, चंडीदान आदि शामिल रहे।

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