
बीकानेर. स्वतंत्रता दिवस पर आज देश के घर-घर तिरंगा फहराया जा रहा है और शहरों में तिरंगा यात्राएं निकाली जा रही हो, लेकिन देश की आजादी से पहले तिरंगा फहराना अपराध था और तिरंगा फहराने पर प्रतिबंध भी लगा हुआ था। स्वतंत्रता सेनानियों की ओर से फहराए जाने वाले तिरंगा को न केवल अंग्रेस राज में पुलिस की ओर से उतार लिया जाता था बल्कि आजादी के दीवानों को यातनाएं भी सहन करनी पड़ती थी।राजस्थान राज्य अभिलेखागार में मौजूद अभिलेख पत्रों के अनुसार आजादी से पहले यहां तिरंगा फहराने पर प्रतिबंध था। तिरंगा फहराने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों को संघर्ष भी करना पड़ता था।
झण्डा फहराने के लिए करना पड़ता था संघर्ष
अभिलेखागार विभाग के निदेशक डॉ. नितिन गोयल के अनुसार अभिलेखागार में वर्ष 1946 के मौजूद अभिलेखों से जानकारी मिलती है कि तत्समय झण्डा फहराने पर प्रतिबंध लगाया हुआ था। झण्डा फहराने वालों को यातनाएं, शारीरिक दण्ड सहन करने पड़ते थे। झंडा फहराने वाले को जेल में डाल दिया जाता था। ब्रिटिशकाल में बीकानेर रियासत में पुलिस की ओर से घरों के बाहर फहराए गए झण्डों को उतारने की कार्यवाही की गई थी।
रात्रि में घरों से उतारे तिरंगे
निदेशक डॉ. गोयल के अनुसार अभिलेखागार में मौजूद वर्ष 1946 के अभिलेखीय पत्रों से जानकारी मिलती है कि बीकानेर में तत्समय झण्डा फहराने वाले स्वतंत्रता सेनानी रघुवीर दयाल, मघाराम, गंगादास के घरों पर लगाए गए झण्डों को जबरन उतारा गया था। उस समय जब रघुवीर दयाल, मघाराम व गंगादास कौशिक के परिवार सदस्यों ने झण्डा उतारने का विरोध किया तो उन पर पुलिस की ओर से यातनाएं-चोट पहुंचाई गई। यह कार्यवाही आधी रात को की गई। इस कार्यवाही से जनता में रोष उत्पन्न हुआ। लेकिन इसके बावजूद भी आजादी के लिए आजादी के दीवानों का संघर्ष निरन्तर जारी रहा।
तिरंगा राष्ट्र प्रेम और गौरव का प्रतीक
इतिहास मानव जीवन के विकास, परिवर्तन को बताने का सबसे सक्षम माध्यम है। जहां पराधीन भारत में एक ओर झंडा फहराने पर प्रतिबंध लगाया गया था, वहीं स्वतंत्र भारत में तिरंगा राष्ट्र प्रेम और गौरव का प्रतीक बना। हर घर तिरंगा, घर घर तिरंगा ।
डॉ. नितिन गोयल,निदेशक, राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर।
Published on:
16 Aug 2024 10:03 pm

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