
Bikaner News : गुजराती ऊंटनी के दूध में प्रोटीन की मात्रा कितनी है और इसमें मिठास क्यों महसूस हो रही है। बीकानेर के राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र में इस पर अनुसंधान किया जाएगा। इसके लिए उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने गुजराती ऊंटनी के दूध के आठ नमूने लिए हैं। अब केन्द्र के वैज्ञानिक इस पर शोध करेंगे। गुजरात गए केन्द्र के वैज्ञानिकों ने भुज में ऊंटनी के दूध पर विशेष ध्यान दिया। केन्द्र के वैज्ञानिकों ने जब गुजराती ऊंटनी के दूध का स्वाद चखा, तो उन्हें थोड़ा मीठा लगा। जबकि राजस्थानी ऊंटनी के दूध में तीखापन होता है। इस पर वैज्ञानिकों ने खान-पान को लेकर वहां के वैज्ञानिकों से चर्चा की।
चर्चा में यह सामने आया कि गुजराती ऊंट के लिए बारह मास जाल का चारा मिलता है। क्यांकि वहां समुद्र का पानी उपलब्ध रहता है। जबकि राजस्थान में बरसात पर निर्भर रहना पड़ता है। अगर बरसात नहीं होती है तो जाल नामक पौधा तैयार नहीं हो पाता है। जाल की पत्तियां अधिक खाने से गुजराती ऊंटनी के दूध में प्रोटीन तथा फैट अधिक होता है।
गुजरात के चराई क्षेत्र में मुख्यत: खारा जाल और लाणा नामक पौधे देखे गए थे। इन पौधों के सेवन से गुजरात की ऊंटनी का दूध कुछ मीठा महसूस लगा। साथ ही इस दूध में फैट और लैक्टोज़ की मात्रा अधिक लगी। इस वजह से दूध में तीखापन कम था। जबकि राजस्थान की ऊंटनियों के दूध में फैट एवं लैक्टोज की मात्रा कम होने के कारण मिठास कम होता है। राजस्थान की ऊंटनियों के दूध में फैट की मात्रा अधिक करने के लिए ही गुजरात के 17 पौधों के नमूनों को बीकानेर लाया गया है। जहां इन पर शोध करके पौधे तैयार किए जाएंगे।
राजस्थानी ऊंटनियों के दूध को लेकर यहां पर लोगों में रुझान कम है। हालांकि बीकानेर में एक-दो स्थानों पर डेयरी के बूथों पर ऊटनी का दूध उपलब्ध हो जाता है, जिसे औषधीय गुणों के लिए काम में लिया जाता है। जबकि गुजरात में लोग ऊंटनी के दूध का अधिक सेवन करते हैं। गुजरात की अमूल संस्था उष्ट्र ‘ दुग्ध संग्रहण बूथ’ संचालित करती है। जहां प्रतिदिन लगभग 1500 लीटर दूध, दुग्ध व्यवसायी पहुंचाते हैं।
वहीं इसके अलग-अलग बूथों में 4000-5000 लीटर दूध प्रतिदिन एकत्रित किया जाता है। इस रुझान को देखते हुए वहां की सरकार भी प्रयास करती है। ऊंटनी के दूध की उपयोगिता को बढ़ावा देने के लिए बीकानेर केन्द्र के वैज्ञानिक ऊंटनी के दूध की उपयोगिता बढ़ाने और इसे जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए एनआरसीसी, अमूल और कामधेनु विश्वविद्यालय के बीच त्रिपक्षीय एमओयू करेंगे।
Updated on:
20 Mar 2024 03:50 pm
Published on:
20 Mar 2024 03:44 pm
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