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खजूर तैयार करने की तकनीकी, पैकेजिंग और विपणन पर होगा काम

खजूर के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के लिए स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (एसकेआरएयू) को एक प्रोजेक्ट की स्वीकृति मिली है।

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प्रोजेक्ट का अनुमोदन पत्र नाबार्ड के मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास ने विश्वविद्यालय के परियोजना प्रभारी को सौंपा

प्रोजेक्ट का अनुमोदन पत्र नाबार्ड के मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास ने विश्वविद्यालय के परियोजना प्रभारी को सौंपा

किसानों को खजूर की उत्पादन प्रक्रिया को सीखने के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इसके लिए बीकानेर में ही प्रशिक्षण मिल सकेगा। अभी इसके लिए भोजका जैसलमेर जाना पड़ता है। खजूर के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के लिए स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (एसकेआरएयू) को एक प्रोजेक्ट की स्वीकृति मिली है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने खजूर के फलों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन ईकाई की स्थापना एवं उत्पाद की तकनीकी विकसित करने के लिए 20.80 लाख रुपए का यह प्रोजेक्ट स्वीकृत किया है। अभी प्रदेश में 1500 हैक्टेयर तथा बीकानेर में 350 हैक्टेयर क्षेत्र में खजूर के बगीचे है। इस प्रोजेक्ट से बीकानेर संभाग के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू सहित क्षेत्र के किसानों को फायदा मिलेगा। प्रोजेक्ट का अनुमोदन पत्र नाबार्ड के मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास ने विश्वविद्यालय के परियोजना प्रभारी को सौंपा है।

खजूर के मूल्य संवर्धित उत्पादों की बढ़ी मांग
परियोजना प्रभारी डॉ. आरएस राठौड़ ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान में खजूर अनुसंधान की दिशा में विवि की ओर से सफल प्रयोग किया गया। पश्चिमी राजस्थान की अतिवादी जलवायुवीय परिस्थितियों और क्षारीय पानी की समस्या के बीच किसानों की आर्थिक मजबूती की दिशा में यह अनुसंधान सफल रहा है। क्षेत्र में किसान खजूर उत्पादन में रुचि दिखा रहे है। क्षेत्रफल भी बढ रहा है। खजूर का बाजार मूल्य किसानों को अच्छा मिल रहा है।

बीकानेर के बाहर भी दिखाया जाएगा खजूर फार्म
प्रोजेक्ट के माध्यम से खजूर फलों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के तहत उत्पाद तैयार करने की तकनीकी, खजूर के फलों की पैकेङ्क्षजग और विपणन आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही 250 किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए दो साल में 8 प्रशिक्षण शिविर आयोजित होंगे। खजूर इकाइयां स्थापित करने वाले 30 किसानों को बीकानेर से बाहर गुजरात के खजूर फार्म का विजिट कराया जाएगा।

अपार संभावनाएं
खजूर के लिए राजस्थान की जलवायु काफी अच्छी है। इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं है। खजूर खेती पहले ही क्षेत्र में किसानों की ओर से की जा रही है। विश्वविद्यालय की ओर से इस प्रोजेक्ट के तहत तकनीक विकसित करने तथा किसानों के प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।
डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे, कुलगुरु एसकेआरएयू