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…जयपुर आकर मीठी बातें करके चले जाते हो, कभी इश्यू पर बात नहीं की, चिकित्सा शिक्षा सचिव का यह रूप देख सकते में आए अफसर

शासन सचिव के सवालों से एजेंसी अधिकारी बचाव की मुद्रा में आ गए। अधिकारी ने सचिव को मोबाइल पर ही बताया कि एसएसबी का प्रबंधन सही तरीके से नहीं हो रहा है।
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मेडिकल शिक्षा सचिव अंबरीश कुमार सोमवार को पीबीएम अस्पताल के कई विभागों एवं एसएसबी की स्थिति देख कर उखड़ गए। उन्होंने जहां-जहां भी निरीक्षण किया, कमियां ही दिखीं। उन्होंने डेढ़ सौ करोड़ की लागत से बने एसएसबी को भी देखा। यहां पर दीवारों से उखड़े प्लास्टर और टाइल्स को देख कर तो उन्होंने मौके से ही मोबाइल फोन से संबंंधित एजेंसी के अधिकारियों को डांट लगानी शुरू कर दी।अधिकारियों से घटिया निर्माण तथा घटिया स्तर के पाइप लगाने के संबंध में कई तरह के सवाल किए।

सकपका गए अधिकारी

शासन सचिव के सवालों से एजेंसी अधिकारी बचाव की मुद्रा में आ गए। अधिकारी ने सचिव को मोबाइल पर ही बताया कि एसएसबी का प्रबंधन सही तरीके से नहीं हो रहा है। शौचालयों की सही तरह से सफाई नहीं होने से पाइप जाम हो जाते हैं। इससे पानी का रिसाव होने लगता है। इस पर शासन सचिव थोड़ा नरम हुए और एजेंसी के अधिकारी को एक सप्ताह में एक्शन प्लान बनाकर देने को कहा।

प्राचार्य रहे सन्नाटे में

निरीक्षण के दौरान जब सचिव ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. गुंजन सोनी से एसएसबी के निर्माण के संबंध में और अन्य समस्याओं पर जानकारी चाही, तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। इस पर सचिव बेहद नाराज हुए और यहां तक बोल गए कि बस जयपुर आकर मीठी बातें करते हो और चले जाते हो। कभी भी अस्पताल के इश्यू नहीं बताए। इतनी बड़ी बिल्डिंग का निर्माण इस स्तर का किया गया है, कभी बताया तक नहीं। उन्होंने कहा कि आपसी सामंजस्य न होने के कारण समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। एसएसबी की अधीक्षक डॉ. सोनाली धवन भी इस दौरान मौजूद थीं।

बच्चा वार्ड मामले को सफाई से छुपा ले गया कॉलेज प्रशासन

मेडिकल शिक्षा विभाग के शासन सचिव अंबरीश कुमार उस वक्त हैरानी में पड़ गए, जब उनसे गत दिनों बच्चा अस्पताल के जांच प्रकरण के बारे में पूछा गया। पत्रिका से बातचीत में जब उनसे बच्चा अस्पताल कांड की जानकारी दी गई, तो वे हैरान रह गए। बोले- इतना बड़ा प्रकरण हो गया और उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी। जबकि सरकार ने सभी तरह की जांचों को निशुल्क कर रखा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों में आपसी सामंजस्य का अभाव होने के कारण समस्याएं उन तक नहीं पहुंच पा रही हैं। उन्होंने कहा चिकित्सक केवल व्यक्तिगत समस्याएं लेकर आते हैं, जबकि चिकित्सकों का दायित्व है कि वे मरीजों की समस्याओं से अवगत कराएं। अस्पताल में 219 चिकित्सक हैं। इसमें से किसी एक को जिम्मेदारी दी जाए, ताकि समस्याओं का समाधान हो सके।