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अब कॉलेज बनेंगे ‘मधुमेह अनुकूल’, 41 नोडल संस्थानों में शुरू होगा मिशन मधुहारी

टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित विद्यार्थियों के लिए प्रशिक्षित प्रभारी होंगे नियुक्त, स्वास्थ्य विभाग देगा प्रशिक्षण बीकानेर. युवाओं में तेजी से बढ़ रहे मधुमेह, खासकर टाइप-1 डायबिटीज के मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान से जोड़ने की पहल की है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के ‘मिशन मधुहारी’ […]
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टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित विद्यार्थियों के लिए प्रशिक्षित प्रभारी होंगे नियुक्त, स्वास्थ्य विभाग देगा प्रशिक्षण


बीकानेर. युवाओं में तेजी से बढ़ रहे मधुमेह, खासकर टाइप-1 डायबिटीज के मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान से जोड़ने की पहल की है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के 'मिशन मधुहारी' के तहत यह योजना शुरू की जा रही है। योजना के तहत अजमेर, अलवर, बालोतरा, बारां, बाड़मेर, ब्यावर, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, डीडवाना, धौलपुर, हनुमानगढ़, उदयपुर समेत प्रदेश के 41 प्रमुख राजकीय महाविद्यालयों को नोडल संस्थान बनाया गया है। इसके लिए प्रत्येक कॉलेज में एक प्रशिक्षित प्रभारी अधिकारी नियुक्त होगा, जो टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित विद्यार्थियों की देखभाल और सहयोगी शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करेगा।

विभाग इन अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देगा, ताकि वे टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को समझते हुए उन्हें समय पर सहयोग उपलब्ध करा सकें। मिशन का उद्देश्य केवल चिकित्सा सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और सहयोगी शैक्षणिक वातावरण तैयार करना भी है। चयनित महाविद्यालयों में राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर भी शामिल है। प्राचार्य प्रो. राजेंद्र पुरोहित के अनुसार, डूंगर कॉलेज में इस मिशन के लिए रजनी कंवर को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।

बीकानेर में 350 बच्चे रजिस्टर्ड

टाइप-1 मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. हरदेव नेहरा के अनुसार, देश में करीब तीन लाख बच्चे टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित हैं। इनमें राजस्थान में लगभग 15 हजार तथा बीकानेर में 700 से 800 बच्चे होने का अनुमान है। इनमें से 350 बच्चे बीकानेर में रजिस्टर्ड हैं और नियमित उपचार ले रहे हैं।


टॉपिक एक्सपर्ट -

विद्यार्थियों को मिलेगा सहारा

भुवनेश पुरोहित, योग प्रशिक्षक

युवाओं में मधुमेह अब तेजी से बढ़ती चुनौती है। पहले इसे बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 20 से 35 वर्ष के युवाओं में भी इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कॉलेजों में मधुमेह अनुकूल परिसर बनने से टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित विद्यार्थियों को काफी सहारा मिलेगा। यदि इस पहल के साथ नियमित योग और जीवनशैली सुधार कार्यक्रम भी जोड़े जाएं तो इसके और बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। योग तनाव कम करने, चयापचय सुधारने तथा मधुमेह प्रबंधन में प्रभावी सहायक भूमिका निभाता है।