
Royal Enfield Taurus Diesel Bullet
Royal Enfield की छवि हमेशा से ही एक परफॉर्मेंस बाइक निर्माता के तौर पर रही है। पुराने दौर में रॉयल एनफील्ड की बाइक्स को लेकर एक अलग ही धारणा रही है, जो कि शायद आज तक बनी हुई है। ज्यादातर लोगों का मानना होता है कि रॉयल एनफील्ड की बाइक्स पावर तो खूब देती हैं, लेकिन माइलेज के मामले में पीछे रह जाती हैं। हालांकि अब तक कंपनी ने अपनी बाइक्स की तकनीक में कई बड़े बदलाव किए हैं, जिससे वाइब्रेशन से लेकर माइलेज तक हर प्वाइंट्स में सुधार देखने को मिला है।
बहरहाल, Royal Enfield का इतिहास काफी पुराना है और ये कंपनी पूरी दुनिया को अपने दमदार बाइक्स की गड़गड़ाहट सुना चुकी है। आज हम आपको रॉयल एनफील्ड की ही एक ऐसी बाइक के बारे में बताएंगे जो अपने दौर में माइलेज के मामले में कम्यूटर बाइक्स से भी कहीं आगे थी। हम बात कर रहे हैं देश की इकलौती डीज़ल बाइक की-
Royal Enfied की डीजल बाइक:
अस्सी के दशक में रॉयल एनफील्ड ने भारतीय बााजर में अपनी डीज़ल बाइक Taurus को लॉन्च किया था, उस दौर में ये बाइक बाज़ार में अपने शानदार माइलेज के लिए मशहूर रही है। इस बाइक का प्रोडक्शन 1980 से लेकर 2000 तक हुआ उसके बाद इसे आधिकारिक तौर पर बिक्री के लिए बंद कर दिया गया।
ये भारतीय ऑटोमोबाइल इतिहास की पहली और अब तक की आखिरी डीजल मोटरसाइकिल है। आपको ये जानकर हैरानी होगी ये दुनिया भर में बेस्ट सेलिंग बाइक रही है। हालांकि ग्लोबल मार्केट में कुछ कंपनियों ने डीजल बाइक्स का निर्माण किया लेकिन अब तक किसी भी कंपनी ने इतना ज्यादा डीज़ल मोटरसाइकिल का प्रोडक्शन नहीं किया है।
माइलेज के मामले में Splendor भी फेल:
Royal Enfield की डीज़ल बुलेट के नाम से मशहूर Taurus माइलेज के मामले में आज के Hero Splendor से भी कहीं आगे थी। रिपोर्ट्स के अनुसार ये बाइक 85 किलोमीटर प्रतिलीटर तक का माइलेज देती थी। उस दौर में ये सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली बाइक रही है, हालांकि उस समय पेट्रोल की कीमत भी आज के मुकाबले काफी कम थी।
इस बाइक में कंपनी ने 325cc की क्षमता का सिंगल सिलिंडर युक्त डीजल इंजन इस्तेमाल किया गया था, जो कि 6.5bhp की पावर और 15Nm का टॉर्क जेनरेट करता था। 4-स्पीड गियरबॉक्स के साथ आने वाले इस इंजन का निर्माण इटली की कंपनी ग्रीव्स लोम्बार्डिनी (Greaves Lombardini) ने किया था। ये रॉयल एनफील्ड का सबसे छोटा इंजन रहा है।
Royal Enfield ने क्यों बलाया डीज़ल बुलेट:
जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, उस समय डीजल की कीमतें बहुत कम थीं और इसने डीजल-संचालित रॉयल एनफील्ड बुलेट को किफायती बनाने में काफी मदद की। इसके अलावा Royal Enfield टॉरस की डीजल यूनिट पर काम करना काफी आसान भी था। पारंपरिक डीजल इंजनों के साथ एक टर्बो और इंटरकूलर इकाई होती है जबकि टॉरस डीजल को एक बेसिक लेआउट दिया गया था। जो कि इसके प्रोडक्शन कॉस्ट को भी कम करती थी।
ये बाइक बाजार में मौजूद अन्य पेट्रोल बाइक्स के मुकाबले ज्यादा धुआं देती थी, यहां तक कि कुछ बाइक्स से काले धुएं भी देखने को मिलते थें। समय के साथ भारत सरकार ने उत्सर्जन मानक नियमों में बदलाव करना शुरू किया और ये बाइक सरकार द्वारा निर्देशित मानकों पर खरा नहीं उतर सकी। ऐसे में कंपनी के पास इसके प्रोडक्शन को बंद करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं था। 196 किलोग्राम की इस बाइक की टॉप स्पीड 65 किलोमीटर प्रतिघंटा थी।
Updated on:
14 Dec 2021 12:08 pm
Published on:
14 Dec 2021 11:55 am

बड़ी खबरें
View Allबाइक
ऑटोमोबाइल
ट्रेंडिंग
