
बिलासपुर. प्रदेश की सभी चिटफंड कंपनियों के खिलाफ अभिकर्ता संघ और १५५ लोगों ने गुरुवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में प्रमुख रूप से कुछ महीने में 13 अभिकर्ताओं द्वारा आत्महत्या किए जाने तथा पुलिस कार्रवाई के नाम पर एजेंटों को बेवजह परेशान करने तथा एफआईआर पर रोक लगाने की मांग की गई है। कहा गया है कि चिटफंड कंपनी की गडबडियों में याचिकाकर्ताओं का कोई कसूर नहीं है। वे तो प्रबंधन के निर्देश पर कंपनी को प्रमोट कर रहे थे, जबकि पुलिस द्वारा चिटफंड कंपनियों पर कार्रवाई की बजाय सीधे एजेंटों पर एफआईआर की गई है। जस्टिस आरसीएस सामंत की एकलपीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई के बाद याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य शासन, डीजीपी और संबंधित एचएसओ को नोटिस जारी कर 8 सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने अभिकर्ता संघ और प्रदेश के सभी प्रमुख शहर अंबिकापुर, जगदलपुर, बस्तर, रायपुर, रायगढ, भिलाई, दुर्ग समेत अन्य शहरों के 155 एजेंटों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें प्रमुख रूप से अभिकर्ताओं द्वारा बडे पैमाने पर आत्महत्या किए जाने एवं पुलिसिया जांच के नाम पर एजेंटों को बेवजह परेशान करने तथा इनके खिलाफ एफआईआर को गलत बताते हुए इस पर रोक लगाए जाने की मांग की गई है।
अधिवक्ता ठाकुर ने हाईकोर्ट को बताया कि प्रदेश में व्यापक स्तर पर हो रहे चिटफंड घोटाले में कई बडी हस्ती, राजनेताओं एवं रसूखदारों का सीधा सरोकार है। कई कंपनियों के संचालन मंडल एवं प्रमोटरों में बडे नेता, मंत्री और उनके परिजन भी शामिल हैं। गत कुछ महीनों में ही पुलिस की प्रताडना से तंग आकर 13 अभिकर्ताओं द्वारा आत्महत्या की गई है।
अगर कुछ वर्षों का आंकडा लें तो ये संख्या कहीं अधिक है। याचिका में आत्महत्या की निष्पक्ष जांच तथा एजेंटों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई बंद किए जाने की मांग की गई है। जस्टिस आरसीएस सामंत की एकलपीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य शासन, डीजीपी और संबंधित एचएसओ को नोटिस जारी कर 8 सप्ताह में जवाब तलब किया है।
याचिका में सहारा, याल्को, केडबल्यूआई भी : अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने बताया कि हाईकोर्ट में दायर याचिका में सहारा इंडिया लिमिटेड, याल्को चिटफंड कंपनी, केडब्ल्यूआई, अनमोल ग्रुप समेत प्रदेश की दर्जनों चिटफंड कंपनी के अभिकर्ता शामिल हैं। याचिकाकर्ता प्रदेश के सभी बडे शहर रायपुर, रायगढ, भिलाई, दुर्ग, कोरबा, खैरा एवं अन्य जगहों से आए हैं। इनका आरोप है कि नियुक्ति रोजगार कार्यालय के माध्यम से हुई है, जिसमें कुछ मंत्रियों का सीधा इंवाल्वमेंट है। मंत्रियों के आश्वासन पर ही अभिकर्ताओं ने कार्य किया है। अब ये लोग मामले से पीछे हट सीधा आरोप एजेंटो पर लगा रहे हैं। अधिवक्ता ठाकुर ने बताया अनमोल ग्रुप सीएम रमन सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह की कंपनी है, जबकि याल्को के संचालन मंडल में सीएम की पत्नी वीणा सिंह शामिल हैं। केडबल्यूआई, कोलकाता वेयर लिमिटेड में कई फिल्मी सितारों का सीधा दखल है।
Published on:
06 Oct 2017 10:44 am
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