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हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल बने तरुण, कहानी पढ़ हो जाएंगे भावुक !

आज के समय में भी ऐसा होता है !

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हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल बने तरुण, कहानी पढ़ हो जाएंगे भावुक !

बिलासपुर. ‘सारे जहां से अच्छा हिंदूस्तां हमारा..., मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना...’, इस गीत को वास्तव में चरितार्थ कर दिखाया है छत्तीसगढिय़ा एकता मंच के प्रदेशाध्यक्ष तरुण कौशिक ने, जो मजहब से ऊपर उठकर इंसानियत का फर्ज निभा रहा है। उसने अपने बचपन के मुस्लिम दोस्त कायनात खान को अपनी किडनी देने का साहसी निर्णय लिया है। आज के युग में जब सगे भाइयों में नहीं बन रही। वैमनस्यता बढ़ रही है। समाज में धर्म के नाम पर झगड़े के सामने आ रहे हैं, तो वहीं इन सबसे हटकर तरुण जैसे लोग मिसाल पेश कर रहे हैं। नगर पालिका तिफरा निवासी सेवानिवृत्त कर्मचारी बीआर कौशिक व चंद्रिका कौशिक के बड़े बेटे तरुण कौशिक ने किडनी देने का जो फैसला लिया है, वह माता-पिता और घर वालों का संस्कार, संस्कृति, और परंपरा का प्रतिफल है। इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म मानने वाले कौशिक परिवार का पुत्र, मिरासद अली व हसीना अली की इकलौती बेटी कायनात पति अमीन खान की दोनों किडनियां खराब होने की खबर पाकर राजधानी छोडकऱ न्यायधानी पहुंचा। उसने शपथ पत्र देकर कायनात को अपनी एक किडनी देने का साहसी निर्णय लिया। तरुण कौशिक ने कहा, इंसानियत से बढकऱ कुछ नहीं। कहीं राह चलते मेरी मौत हो जाए तो क्या फायदा, इससे बेहतर है यदि मेरे शरीर के किसी अंग से किसी को नई जिंदगी मिलती है। मैंने अपने दोस्त को किडनी देने का फैसला लेकर अपनी दोस्ती का फर्ज अदा किया है। कायनात ने भी तरुण जैसे दोस्त पाकर धन्य होने की बात कही। तरुण के फैसले से सभी दोस्त गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

मंच के सदस्यों ने सराहा
तरुण कौशिक द्वारा मुस्लिम समाज की लडक़ी को किडऩी देने का साहसी फैसला लेने पर छत्तीसगढिय़ा एकता मंच के प्रदेश सचिव भागवत प्रसाद लोधी, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विनेन्द्र निर्मलकर, हितेन्द्र भारद्वाज ने संयुक्त रूप से पूरी तरह से किडनी ट्रांसप्लाट में सहयोग करने की बात कही है।

राज्य शासन से मांगी अनुमति
अपनी किडनी देने की इच्छा रखने वाले तरुण ने किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए राज्य शाासन स ेअनुमति मांगी है।