
rajasthan election 2018
राजीव द्विवेदी/बिलासपुर. जब तक टिकट घोषित नहीं हो जाते तब तक उम्मीद कायम है और जब तक उम्मीद कायम है तब तक दावेदार तो हैं, बाद में तो पार्टी के लिए जुटना ही है, सरगुजा इलाके के एक भाजपा पदाधिकारी जब कहते हैं तो साथ ही यह भी जोड़ देते हैं कि जनता में इस बार स्थानिय प्रत्याशियों की मांग दोनों ही दलों में है। कार्यकर्ताओं का भी मानना है कि प्रत्याशी स्थानीय हो तो चुनाव आसान रहेगा। यह तस्वीर पूरे सरगुजा में ही नजर आती है। सरगुजा के 7 कांग्रेसी विधायक हों या भाजपा के इकलौते विधायक गृहमंत्री रामसेवक पैकरा, क्षेत्र में दावेदार खुद को उन से बेहतर बता रहे हैं।
प्रेमनगर और भटगांव में स्थानीयता मुद्दा
सूरजपुर जिले के प्रेमनगर विधायक खेलसाय सिंह के प्रति लोगों की नाराजगी निष्क्रियता को लेकर है। हालांकि सूरजपुर महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष दीप्ति स्वाईं का कहना है कि शुरू में विधायक के प्रति नाराजगी थी, अब नहीं। जीएसटी, पेट्रोल-डीजल की मंहगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा अब प्रमुख मुद्दा है। वहीं भाजपा से टिकट के दावेदार भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अजय गोयल का कहना है कि भाजपा पिछली बार भटगांव इसलिए हारी, क्योंकि प्रत्याशी बाहरी था। इस बार यह गलती न दोरहाएं तो अच्छा रहेगा। यहां पार्टी जीतने की स्थिति में, प्रत्याशी पर निर्भर करेगा। यहां के जिलाध्यक्ष अमलेश कुमार का मानना है कि जनता के बीच सक्रियता और लोकप्रियता टिकट देने का आधार बने तो अच्छा रहेगा।
प्रतापपुर और रामानुंजगंज में भी अंसतोष
प्रतापपुर में विधायक (गृहमंत्री रामसेवक पैकरा) को रिपीट करने को लेकर मतभेद है, वहीं कांग्रेस में भी परंपरागत प्रत्याशी की जगह नए चेहरे को मौका देने की मांग उठ रही है। प्रतापपुर से कांग्रेस प्रदेश महामंत्री शिवभजन सिंह जिला पंचायत सदस्य भी हैं। वे कहते हैं कि पार्टी ही नहीं जनता के भी मन में है कि यहां परंपरागत प्रत्याशी के बजाय कांग्रेस से किसी नए और सक्रिय चेहरे को मौका दिया जाए। पिछली बार प्रत्याशी रहे प्रेमसाय सिंह लगातार यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस को अब प्रत्याशी बदलने पर सोचना चाहिए।
किस करवट बैठेगा लुंड्रा और सामरी में ऊंट
सरगुजा के लुंड्रा और सामरी में टिकट की अदलाबदली पर गंभीरता से विचार चल रहा है। लुंड्रा के विधायक चिंतामणि महाराज सामरी में एक्टिव भी हो चुके हैं, हालांकि हालांकि सामरी विधायक डा. प्रीतम राम की रुचि लुंड्रा के प्रति ज्यादा नहीं है। वे भी यही कहते हैं कि अपने क्षेत्र में बेहतर कर रहा हूं, मुझे किसी और विधानसभा से लडऩे की क्या जरूरत है? हालांकि कांग्रेस में निष्क्रियता के आधार पर लुंड्रा क्षेत्र से डा. प्रीतम राम के भाई रामदेव राम को विधायक होते हुए भी चेंज किया गया था और चिंतामणि महराज को टिकट दी गई थी।
इस बार इसी तरह के हालात चिंतामणि महराज के साथ हैं। जनता उनसे खुश नहीं है और चिंतामणि महराज खुद अपनी सीट बदलने की कोशिश में हैं। लुंड्रा से कांग्रेस में दुर्गा प्रसाद शांडिल्य, शंकुति देवी भी दावेदार हैं। भाजपा से प्रबोध मिंज, फुलेश्वरी देवी के नाम हैं। अंबिकापुर में विधायक टीएस सिंहदेव का सिंगल नाम है, हालांकि भाजपा से अगर अनुराग सिंहदेव को टिकट मिलता है तो वे तीसरी बार टीएस से भिडेंगे। हालांकि यहां से सरगुजा के भाजपा जिलाध्यक्ष अखिलेश सोनी, भाजपा नेता मेजर अनिल सिंह भी दावेदार हैं। लेकिन इस सीट पर कांग्रेस को टक्कर देने के लिए भाजपा आदिवासी कार्ड खेलने पर भी विचार कर रही है।
कांग्रेस के गढ़ में भाजपा लगा रही जोर
सीतापुर सीट ऐसी है, जहां से कांग्रेस को हराने में भाजपा को हमेशा एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता है लेकिन हरा नहीं पाती। इसकी वजह भाजपा किसान मोर्चा अध्यक्ष अनिल अग्रवाल बताते हैं कि यहां से एक समय भाजपा को यहां से प्रत्याशी तलाशने पड़ते थे, लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं। भाजपा के पास सक्रिय और जनता से जुड़े प्रत्याशियों की लिस्ट है। बेहतर कैंडिडेट को टिकट मिलेगी और स्थिति बदलने में सफल रहेंगे। यहां से कांग्रेस नेता शैलेंद्र सिंहदेव का कहना है यहां से 13 लोगों ने दावेदारी की है। विधायक के नाते अमरजीत भगत तो पहले नंबर पर हैं ही।
Updated on:
17 Oct 2018 06:31 pm
Published on:
17 Oct 2018 06:27 pm

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