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क्रिप्टो करेंसी का मायाजाल…. CEO ने ज्यादा पैसे का दिया लालच, फिर ऐसे ठग लिए 10 लाख रुपए

Crypto Currency Fraud In Chhattisgarh : आईएनएफ लीव क्रिप्टो करेंसी कम्पनी में इंवेस्ट करने पर दुगनी राशि लौटाने का झांसा देकर आरोपी ने 12 लोगों से 10 लाख रुपए इंवेस्ट कराया और इसके बाद फरार हो गया।

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क्रिप्टो करेंसी का मायाजाल.... CEO ने ज्यादा पैसे का दिया लालच, फिर ऐसे ठग लिए 10 लाख रुपए

क्रिप्टो करेंसी का मायाजाल.... CEO ने ज्यादा पैसे का दिया लालच, फिर ऐसे ठग लिए 10 लाख रुपए

बिलासपुर. आईएनएफ लीव क्रिप्टो करेंसी कम्पनी में इंवेस्ट करने पर दुगनी राशि लौटाने का झांसा देकर आरोपी ने 12 लोगों से 10 लाख रुपए इंवेस्ट कराया और इसके बाद फरार हो गया। पीड़ितों को ठगी का एहसास तब हुआ, जब आरोपी ने उनका फोन उठाना बंद कर दिया।यही नहीं, जब पीड़ित बताए कार्यालय के पते पर पहुंचे तो ऐसा कोई कार्यालय ही नहीं था। शिकायत पर तोरवा पुलिस अपराध दर्ज कर मामले की जांच को आगे बढ़ा रही है।

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पुलिस के अनुसार हेमूनगर तहसीलदार गली निवासी गोपेश्वर प्रसाद पिता अम्बिका राम साहू (41) जिला पंचायत कार्यालय में कार्यरत है। गोपेश्वर ने आईएनएफ लीव क्रिप्टो करेंसी कम्पनी के संचालक राजेन्द्र कुमार बंजारे के खिलाफ शिकायत की है।

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पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया कि वर्ष 2018 में राजेन्द्र कुमार बंजारे से उनकी मुलाकात हॉटल में क्रिप्टो करेंसी में हुई थी, मोटिवेशन सेमीनार में दुर्ग अंडा क्षेत्र के चिंगरी गांव निवासी राजेन्द्र कुमार बंजारे ने अपना परिचय आईएनएफ लीव क्रिप्टो करेंसी का सीईओ होना बताया। सेमिनार में राजेन्द्र कुमार ने रुपए इंवेस्ट करने से दुगना व कई बार तीगुना मुनाफा दिलाने का झांसा दिया। रुपए इंवेस्ट के लिए आरोपी राजेन्द्र कुमार बंजारे ने आईएनएफ लीव डॉट काम वेबसाइट भी दिखाया, वेबसाइड में इंवेस्ट रुपए का ब्याजदर देख कर उनकी बात बातों पर गोपेश्वर प्रसाद साहू को विश्वास हो गया।

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गोपेश्वर साहू ने 2 लाख, शरद मिश्रा ने 1 लाख 50 हजार, विक्की जसवानी, सत्यदेव गुप्ता, गोपाल दत्ता, सुनील गुप्ता, रवि बंजारे, शेख ताजिम, पी पन्नालाल, नरेन्द्र जायसवाल, संजीव निषाद, मनीष शर्मा व अन्य ने भरोसे में वर्ष 2018 से 2020 तक 10 लाख 50 हजार रुपए इंवेस्ट कर दिया।

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रुपए इंवेस्ट होने के बाद जब मुनाफे के रुपए नहीं आए तो पीड़ितो ने फोन कर राजेन्द्र कुमार बंजारे से बात करनी चाही। पहले तो वह गोल मोल जवाब देकर बात को टालने लगा उसके बाद फोन उठाना बंद कर दिया। ठगी का एहसास होने पर पीड़ितों ने तोरवा थाने पहुंच कर मामले की शिकायत दर्ज कराई है। तोरवा पुलिस मामले में अपराध दर्ज कर जांच को आगे बढ़ा रही है।

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दुर्ग पहुंच कर देखा तो नहीं थी बताई जगह पर कम्पनी


पीड़ित गोपेश्वर साहू व अन्य पीड़ितों ने बताया कि रुपए न आने पर आरोपी ने दुर्ग में अपना कार्यालय जहां होने का पता बताया था। उस जगह पर सभी पीड़ित एक साथ पहुंचे, तो वहां पहुंचने के बाद पता चला कि जिस नाम से वह ऑफिस खोज रहे हैं उस नाम का वहां कोई कार्यालय ही नहीं है।