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कोटा-तखतपुर के लोग डाकघर में और मस्तूरी के लोग चिटफंड कंपनी में जमा कर रहे रकम

मस्तूरी क्षेत्र के लोगों का रुझान चिटफंड कंपनियों की तरफ अधिक रहा। इसके चलते उनके लाखों रुपए डूब गए

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Kajal Kiran Kashyap

Sep 03, 2016

-chitfundcompany

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बिलासपुर .
मस्तूरी क्षेत्र के लोगों का रुझान चिटफंड कंपनियों की तरफ अधिक रहा। इसके चलते उनके लाखों रुपए डूब गए। कई चिटफंड कंपनियां करोड़ों रुपए लेकर चंपत हो गईं। दूसरी तरफ कोटा, तखतपुर, गौरेला व बिल्हा तहसील के ग्रामीणों ने डाकघर में रकम जमा करने में अधिक रुचि दिखाई है। इन क्षेत्र के लोगों ने पांच साल के भीतर 40 करोड़ रुपए डाक घर की अल्प बचत योजना में जमा किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लघु राशि जमा करने के लिए जिला अल्प बचत शाखा ने गांव-गांव में सैकड़ों की तादाद में एजेंट बनाए हैं। इन अभिकर्ताओं के माध्यम से एकत्र की गई राशि डाकघरों की विभिन्न शाखाओं में जमा की जाती है। अल्प बचत की विभिन्न योजनाओं के तहत एक से लेकर सात वर्ष तक राशि जमा करने का प्रावधान है। जमा करने वाली न्यूनतम मासिक राशि एक हजार रुपए है।


एक जिला, दो रुझान

अल्प बचत के क्षेत्र में जिले में मस्तूरी तहसील क्षेत्र में ग्रामीणों का सर्वाधिक रुझान चिटफंड कंपनियों की तरफ रहा है। इस क्षेत्र लोगों ने चिटफंड कंपनियों में लाखों रुपए निवेश किए। एक-दो वर्ष के अंतराल में चिटफंड कंपनियां सैकड़ों लोगों की जमा पूंजी समेटकर चंपत हो गईं। इसके बाद अल्प बचत के कार्यालय में कंपनी के बारे में लोग पूछने के लिए पहुंचते रहे हैं। वहीं कोटा, बेलगहना, रतनपुर, गौरेला, तखतपुर व बिल्हा क्षेत्र के ग्रामीणों का भरोसा डाकघर पर अधिक रहा।


राज्य सरकार ने पांच वर्ष से लक्ष्य नहीं दिया

राज्य सरकार ने वर्ष 2011 के बाद से जिले में कार्यरत अल्प बचत संगठन को डाकघरों में राशि जमा करने के लिए कोई लक्ष्य नहीं दिया है। पांच वर्ष पहले वित्तीय वर्ष में 40 करोड़ रुपए जमा करने का लक्ष्य दिया था। जिले में अल्प बचत के अभिकर्ताओं में धीरे-धीरे रुझान कम होने लगा है। पांच से दस वर्ष पुराने अभिकर्ता काम छोड़ रहे हैं। जिले में अल्प बचत अभिकर्ताओं की संख्या सिमट कर 513 रह गई है।


अल्प बचत के अभिकर्ताओं के माध्यम से जिले में सालाना 40 करोड़ रुपए डाकघर में जमा हो रहे हैं। मस्तूरी तहसील क्षेत्र के अधिकांश लोग चिटफंड कंपनियों में राशि निवेश करके डूब गए।


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