
बिलासपुरवासियों के मनोमस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ गए अटल
बिलासपुर. अपनी सरल सहज दम पर देश और विदेश की राजनीति में अमिट छाप छोडऩे वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का बिलासपुर और यहां के नागरिकों से पुराना नाता रहा है। गोलबाजार, गोड़पारा समेत शहर के अन्य इलाकों के गली मोहल्ले से वे भली भांति परिचित रहे। जनसंघ के जमाने में जब अटल बिहारी बाजपेयी का बिलासपुर आगमन होता तो वे यहां जनसंघ के नेता स्वर्गीय मदनलाल शुक्ला के अपना लॉज गोलबाजार में ठहरते थे । यहीं पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ वे बैठक करते और गोलबाजार, सदर बाजार में घूमकर आमजनों से मिलकर चर्चा करते।
पूर्व मंत्री खंडेलवाल के यहां ठहरे दिन- अटल बिहारी बाजपेयी करीब 40 -45 साल पहले पूर्व मंत्री मूलचंद खंडेलवाल के आदर्श पंजाबी कॉलोनी के निवास में ठहरे थे। पूर्व मंत्री की पत्नी देवकी खंडेलवाल ने अपने घर पर आरती उतारकर उनका स्वागत किया। देवकी देवी बताती है कि पूर्व प्रधानमंत्री बेहद सरल स्वभाव और खाने-पीने के शौकीन रहे वे उनके खाने और नास्ते की तारीफ किया करते और घरेलू चर्चा करते।
पूर्व विधायक बलराम और चंद्रप्रकाश ने की थी मुलाकात-भाजपा के प्रदेश संवाद प्रमुख बेनी गुप्ता और पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश बाजपेयी ने बताया कि करीब चौबीस-पच्चीस साल पूर्व जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी लोकसभा में नेताप्रतिपक्ष रहे तब उनका यहां बिलासपुर आगमन हुआ। वे यहां सर्किट हाउस में ठहरे थे उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा और विक्रम वर्मा भी थे। तब सर्किट हाउस में पूर्व विधायक बलराम सिंह ठाकुर, पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश बाजपेयी ने उनसे भेंटकर उनसे बिलासपुर रेलवे को रेलवे जोन बनाने की मांग की थी। नेताप्रतिपक्ष अटल बिहारी ने उनकी मांग का समर्थन कर हर संभव मदद का आश्वासन दिया था।
अमर ने कहा खो दिया जननेता- नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी से बहुत सी यादें जुडी हैं, सन् 1973 में वे पसैंजर ट्रेन से खरसिया में पंडित दीनदयाल की प्रतिमा का अनावरण करने आए थे, उस समय वे बहुत छोटे थे। इसके बाद 1998 में फिर उनका खरसिया आगमन हुआ तब वे उनके घर भी आए चाय-नाश्ते के बाद जब मैने उन्हें पान भेंट किया तो उन्होंने पूछा कि यहां पान कौन खाता है बाबूजी मैं सब डर गए फिर उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं पान शंकर जी का प्रसाद है खाना चाहिए। सन् 1989 में जब दिलीप सिंह जूदेव ने जांजगीर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा तब मैं अटल जी को जांजगीर की सभा में लेकर गया स्टेशन के बाहर भारी भीड़ थी, यहां बिलासपुर लोकसभा से रेशम लाल जांगड़े प्रत्याशी थे वे उन्हें ट्रेन से उतारकर भीड़ के साथ स्टेशन के बाहर ले गए और वहीं उनकी सभा हुई। इसके बाद वे एक बार यहां एक शादी समारोह में भाग लेने के लिए बिलासपुर भी आए तब वे यहां जाजोदिया धर्मशाला में ठहरे थे। उनके जाने से देश और समाज को बड़ी क्षति हुई है।
सांसद साय की वाक शैली से हुए प्रभावित - भाजपा के प्रदेश संवाद प्रमुख बेनी गुप्ता ने बताया कि सन् तो याद नहीं है लेकिन रामराज अभियान में उनका रायगढ़ आगमन हुआ था जो आज भी याद है, यहां सांसद नंदकुमार साय ने जब उनके सम्मान में हिंदी और संस्कृत में दोहे पढ़े अटल जी गदगद हो गए और कहा कि जब आपके यहां इतने अच्छे वक्ता है तो फिर मुझे दिल्ली से यहां बुलाने की क्या जरूरत है।
अटल ने कहा और बन गई पटवा की सरकार- प्रदेश संवाद प्रमुख ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के रायगढ़ आगमन के दौरान वे उनकी तीमारदारी में थे, पूर्व प्रधानमंत्री ने यहां आयोजित आदिवासी रैली को देखने की इच्छा जाहिर की, वे एक मारूति वैन का इंतजाम कर अटल बिहारी को आदिवासी रैली दिखाने ले गए। किनारे खड़े होकर रैली देखते रहे तभी भीड़ से कुछ लोगों ने उन्हें पहचान लिया और उनकी तरफ बढ़े तो अटल जी ने वहां से चलने का ईशारा किया और हम फिर सर्किट हाउस आ गए। यहां सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तपती दुपहरी में नंगे पैर बिना चप्पल के रायगढ़ की धरा पर चलकर आदिवासियों ने अपनी भागीदारी निभाई और सकरार के खिलाफ अपने आक्रोश को व्यक्त किया है आने वाले चुनाव में भाजपा को सरकार बनाने से कोई नहीं रोक सकता। चुनाव हुए और सुंदरलाल पटवा की सरकार बनी।
कहा टोपी न लगाने पर टोंकते और रो पड़े मिरी- पूर्व राज्य सभा सदस्य गोबिंदराम मिरी ने कहा कि उनके निधन से राजनीति के एक युग का अंत हो गया। हिंदुस्तान की राजनीति में उनके जैसा दूसरा कोई नेता नहीं है। उन्होंने बताया कि जब वे राज्यसभा के सदस्य रहे तब से हिमांचल टोपी लगाते ऐसे में जब पूर्व प्रधानमंत्री से भेंट होती और सिर पर टोपी नहीं होती वे टोंकते और कहते अब बात नहीं करेंगे मैं क्षमा याचना करता। मसानगंज में वे मिश्रा परिवार की शादी में आए थे तब मसानगंज से जाजोदिया धर्मशाला जहा वे ठहरे थे वहां तक मुंगफल्ली खाते और चर्चा करते चले गए समय का पता नहीं चला। उन्हें रायपुर जाना था तो कहा आप चलिए मैं उनके साथ था बिल्हा विधानसभा क्षेत्र से उस समय प्रत्याशी रहे भानू प्रसाद गुप्ता ने रोका और भाषण देने का आग्रह किया आनन-फानन में बिना किसी तैयारी के अटल बिहारी ने पीपल चौक पर सभा को संबोधित किया उन्हें सुनने के लिए हमेशा की तरह कांग्रेंस के नेता भी दूर से खड़े रहे।
पदमश्री चतुर्वेदी ने जताया दुख कहा दो बार मिला- पद्मश्री पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि न भूतो न भविष्यति उनके जैसे नेता न हुए न होंगे ऐसा लगता है। वे एकदम सहज और सरल थे सबसे खुशमिजाजी से मिलते सन् 1997 में उन्होंने दिल्ली में उनसे भेंट की और अपनी पुस्तक भेंट की। इसके बाद सन् 2004 में राजधानी में आयोजित राज्योत्सव समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री ने उन्हें पंडित सुंदरलाल शर्मा पुरस्कार से सम्मानित किया।
Published on:
16 Aug 2018 08:17 pm
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