
CG ELECTION 2018 : भाजपा के पास दावेदारों का कोटा में इतना टोटा कि हारे काशी, बाहरी जूदेव ही विकल्प
सतीश यादव/ बिलासपुर. कोटा विधान सभा सीट भाजपा के लिए नाक का सवाल हो गई है। भाजपा हर बार इस सीट को जीतने का दावा करती है लेकिन हर बार इनको हार का सामना करना पड़ता है। लगातार हार का मुंह देखकर अब भाजपा नेेता थक चुके है इसलिए कोई बड़ा प्रत्याशी इस सीट चुनाव लडऩे के लिए तैयार नहीं है। यही कारण है भाजपा इस सीट से प्रत्याशी घोषित नहीं कर पा रही है। कोटा विधान सभा सीट इस साल भाजपा जीतने का दावा कर रही है। मुख्यमंत्री से लेकर भाजपा के दिग्गज नेताओं द्वारा इस सीट को जीतने के लिए बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं।
लेकिन कैसे जीत पाएंगे यह कोई नहीं बता पता है। भाजपा चुनाव जीतने के लिए वह सारे हथकंडे अपना चुकी है जो एक पार्टी चुनाव जीतने के लिए करती है। भाजपा पिछले 15 साल से सत्ता में मन की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी कोटा क्षेत्र के मतदाताओं मन के मटटोल नहीं पाई है कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि क्षेत्र की जनता भाजपा को इस सीट नहीं चाहती। इस मामले में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि इस बार इस सीट को जीत सकते हैं क्योंकि इस बार मुकाबला त्रिकोणीय रहेगा। कांग्रेस का वोट दो भाग में बंट जाएगा।
जिसका फायदा आसानी से मिल सकता है लेकिन अब एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिर इस सीट से भाजपा के कोई प्रत्याशी चुनाव क्यों नहीं लडऩा चाहते? ऐसा नहीं है कि भाजपा ने अपने नेताओं को यहां से उतारने की कोशिश नहीं की। कई दिग्गज नेताओं का नाम कोटा से चलाया गया क्षेत्र का दौरा भी किए लेकिन नेताओ को समझ में आ गया इसलिए कोटा से चुनाव लडऩे से पीछे हट रहे हैं। सबसे पहले इस सीट से सांसद लखन लाल साहू का नाम चला। फिर प्रबल प्रताप सिंह का नाम चलाया गया इसके बाद कोई नहीं मिला तो फिर पुराने नेता काशीराम साहू की ओर दौड़े इस बीच रतनपुर के एक युवा नेता का भी नाम चल रहा है। लेकिन कुल मिलाकर बात यह सामने आ रही है इस सीट से चुनाव लउऩे के लिए कोई आगे नहीं आना चाहता है। प्रत्याशियों को पता है कि इस सीट से भाजपा को हार ही मिलती है।
Published on:
27 Oct 2018 01:03 pm
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