
बीयू अब कहलाएगी अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी
बिलासपुर. राज्य सरकार ने बिलासपुर यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर अब भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के नाम पर करने का फैसला किया है। इस आशय की खबर मिलने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन के अफसरों ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की। केबीनेट की बैठक में बीयू का नामकरण भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी यूनिवर्सिटी करने का निर्णय लेने की खबर के बाद बीयू के प्राध्यापकों, स्टाफ और विद्यार्थियों ने खुशी जाहिर की। प्राध्यापकों ने कुलपति प्रोफेसर जीडी शर्मा से मुलाकात की और मिठाई बांटी। सन् 2009 में गुरुघासीदास यूनिवर्सिटी के पदोन्नत होकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनने के बाद से अंचल में स्टेट यूनिवर्सिटी की मांग की जाती रही। जून 2012 में नार्मल स्कूल के पुराने हाईकोर्ट भवन में बिलासपुर यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई। इसके बाद से यूनिवर्सिर्टी का नामकरण किसी महापुरुष या स्थानीय व्यक्ति के नाम पर करने की मांग की जाती रही है। पूर्व प्रधानमंत्री के नाम से नामकरण होने की खबर से पूरे अंचल में खुशी का माहौल है। वर्तमान में बिलासपुर यूनिवर्सिटी में डिप्लोमा कोर्स योगा समेत छह फेकल्टी हैं। वहीं 175 शासकीय व निजी कॉलेज इससे संबद्ध हैं।
युवा मोर्चा और एबीवीपी ने भी मनाई खुशियां : पूर्व प्रधानमंत्री के निधन के बाद युवा मोर्चा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी बिलासपुर यूनिवर्सिटी का नामकरण पूर्व पीएम भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर करने की मांग की थी। मांग पूरी होने पर युवा मोर्चा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी खुशी जाहिर की है।
बेहद शानदार डिसीजन : बहुत ही अच्छा निर्णय है। बिलासपुर यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर किया गया है, वे अजात शत्रु रहे। उनके सद्गुण और आशीर्वाद से यूनिवर्सिटी को राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। स्टाफ और विद्यार्थी उनके नाम से गौरवान्वित होंगे।
डॉ इंदू अनंत, कुलसचिव, बीयू अब एबीवी यूनिवर्सिटी
हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा : पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से यूनिवर्सिटी का नाम होने से ऐसा लगा कि मन की मूराद पूरी हो गई। यूनिवर्सिटी को राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली को आदर्श बनाकर काम करेंगे विद्यार्थियों को भी गौरव का एअहसास होगा। अधिसूचना जारी होने के बाद शासन को प्रस्ताव भेजकर उनकी किताबों और कविताओं को हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा।
डॉ. जीडी शर्मा, कुलपति, बीयू (अब एबीवी यूनिवर्सिटी)
Published on:
22 Aug 2018 03:18 pm
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