
file photo
साइबर क्राइम(Cyber Crime) पूरी तरह से आपके डाटा का खेल होता है। चाहे ठगी हो, ब्लैकमेलिंग हो ये बिना आपके डाटा के संभव नहीं है। कुछ मामलों में पुलिस ठगों को पकड़ तो लेती है पर उनके पास आपका डाटा कहां से आया आज तक पता नहीं चल सका है। कारण यह बताया जा रहा है कि आपके डाटा को कुरियर ब्वॉय से लेकर कंपनी कोई भी बेच सकता है दूसरी ओर यदि आपका डेटा हैकिंग (Data Hacking) के माध्यम से हासिल किया गया है तो इसे पकडऩा इसलिए मुश्किल है क्योंकि हैकर डॉट ऑनियन वेब का इस्तेमाल करता है ये प्याज की तरह कई परतों में उलझा हुआ है जहां तक पहुंचना फिलहाल पुलिस के लिए मुश्किल है।
ठगों के पास आपका डाटा कहां से आया इसका नहीं मिल पाता सुराग
बिलासपुर जिले की बात करें तो इस वर्ष साइबर ठगी के 63 मामले दर्ज किए गए हैं जिसमें एक का निराकरण हुआ है वहीं सोशल मीडिया के माध्यम से झांसा देकर ब्लैकमेलिंग के दो और अन्य आईटी एक्ट की धाराओं में 26 मामले दर्ज किए गए हैं।
बड़ा प्रश्न यह है कि इनके पास आपका डाटा यानि आपकी जानकारी कहां से आई। फिलहाल पुलिस भी इसका उत्तर देने में सक्षम नहीं है। कारण यह बताया जा रहा है कि अब तक साइबर फ्रॉड के मामले में जितने आरोपी पकडे गए हैं वो प्यादे होते हैं उसका मास्टर माइंड पकड़ से बाहर है। यदि मास्टर माइंड पकड़ा जाए तो इस बात का खुलासा हो सकता है कि आपका डाटा संबंधित के पास कहां से आया। वर्तमान में पुलिस डाटा चोरी या बिक्री को नहीं रोक सकती, लेकिन उसके पास ऐसे संसाधन भी नहीं है जिससे वह यह पता लगा सके की डाटा आखिर कहां से और कौन बिक्री कर रहा है।
कुरियर ब्वॉय से लेकर कंपनी.. कोई भी...!
पुलिस के अनुसार आपका डाटा एक कोरियर बॉय से लेकर कम्पनी तक से हासिल किया जा सकता है। डेटा को बेचने वाला कौन है, इसका पता लगाना काफी मुश्किल होता है। इसका कारण यह है कि हैकर किसी रजिस्टर्ड वेब साइट पर काम नहीं करते। हैकर हमेशा डॉट ऑनियन वेबसाइट का इस्तेमाल करते हैं, जिस तरह प्याज परत दर परत बंद होता है उसी तरह हैकर को पकड़ने एक या दो परत तक तो पुलिस पहुंच सकती है लेकिन सारी परत उधेड़कर इन तक पहुंचना काफी मुश्किल होता है।
पुराना एंड्रॉयड वर्जन भी डाटा लीक होने का एक कारण हैं
बड़ी कम्पनियों के मोबाइल में डेटा सुरक्षा को लेकर जोर दिया जाता है, यही कारण है की इनके साफ्टवेयर व हार्ड वेयर काफी मंहगे होते हैं, ऐसे में बड़ी कम्पनियों के मोबाइल भी मंहगे होते हैं। वहीं सस्ते दर पर जो मोबाइल मार्केट में उपलब्ध हैं उनमें सुरक्षा को लेकर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता।
वाट्सएप और एम्स का डाटा हुआ था हैक...
हाल में हैकरों ने वाट्सएप और एम्स दिल्ली में मरीजो के डेटा को हैक कर लिया था। हैकर ने सरकार से इसके बदले काफी मोटी रकम की मांग की थी। जिस रफ्तार से हैकर डेटा हैक कर रहे है इससे डेटा की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवालिया निशान खड़ा होने लगा है।
साइबर एक्सपर्ट दुष्यंत ने बताया कि डेटा चोरी होना भारत ही नहीं पूरे देश की समस्या हैं। बड़ी बड़ी कम्पनियां डेटा चोरी को रोकने के लिए अपने अपने स्तर पर काम कर रही हैं। लोगों को अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल कर स्वंय से जागरूक होने की आवश्यकता हैं, तभी साइबर अपराध को रोका जा सकता है।
पुलिस साइबर अपराध को रोकने के लिए लगातार अपने स्तर पर प्रयास कर रही हैं। लोगो के बीच कई जागरूकता अभियान भी चलाती हैं। लगातार अभियान के बाद भी लोग उन्हीं गलती को दुबारा दोहराते रहते हैं। साइबर अपराध को रोकने के लिए लोगो का जगरूक होना काफी जरूरी है।
पारुल माथुर, डीआईजी बिलासपुर
Published on:
11 Dec 2022 01:57 pm
बड़ी खबरें
View Allबिलासपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
