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अपनी चौखट से किसी को खाली हाथ नहीं जाने देतीं माँ डिडनेश्वरी देवी, शुद्ध काले ग्रेनाइड से बनी माता की अनोखी प्रतिमा

बिलासपुर का मल्हार क्षेत्र जहां बिखरी पड़ी है पुरातत्व संपदा, धार्मिक आस्था का केंद्र है मां डिडनेश्वरी का मंदिर

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अपनी चौखट से किसी को खाली हाथ नहीं जाने देतीं माँ डिडनेश्वरी देवी, शुद्ध काले ग्रेनाइड से बनी माता की अनोखी प्रतिमा

बिलासपुर. शुद्ध काले ग्रेनाइड से बनी मां डिडनेश्वरी की प्रतिमा लोगों की आस्था का केंद्र है। हजारो लोग मां डिडनेश्वरी के दर्शन के लिए पहुंचते है। मान्यता है कि देवी के दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। माता अपने दरबार से किसी को भी खाली हाथ नहीं जाने देती। यहां स्थानीय लोगों के अलावा पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश और देशभर से लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मल्हार में पुरातत्व के अनेक मंदिरों के अवशेष हैं।

मूर्ति कला का उत्तम नमूना
बिलासपुर से 40 किमी दूर यह जोधरा मार्ग पर मौजूद मल्हार गांव डिडनेश्वरी देवी के कारण प्रसिद्व है। कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण 10 वीं-11 वीं ई. में हुआ था। 52 शक्तिपीठों में 51 वां शक्तीपीठ मल्हार में हैं। ये मूर्ति कला का उत्तम नमूना है। शुद्व काले ग्रेनाइड से बना है। शुद्ध काले ग्रेनाइड से बनी प्रतिमा से अनोखी ध्वनी निकलती है।

नवरात्रि में विशेष आयोजन
चेत्र नवरात्रि के दिनों में लोग माता डिडनेश्वरी के रंग में रंग जाते है। गांव में भक्ति का माहौल रहता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना व धार्मिक आयोजन होते हैं।


प्राकृतिक व पुरातत्व से भरपूर है यह क्षेत्र
मल्हार के आसपास पूरा क्षेत्र प्राकृतिक व पुरातत्व धरोहरों से भरपूर है। मल्हार के केवट मोहल्ले में जैन तीर्थकर सुपाŸवनाथ के संग नौ तीर्थकर मूर्ति स्थापित है। गांव वाले उसे नंदमहल कहते हैं। मंदिर, पत्थर, मूर्तियों के अलावा यहां पर पुरातत्व संपदाएं बिखरीं पड़ी हुईं हैं।

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