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गरीब बच्चों का एडमिशन अधूरा! RTE प्रवेश में देरी पर सख्त हुआ हाईकोर्ट, शिक्षा विभाग को जारी किया नोटिस…

RTE Admission 2026: बिलासपुर जिले में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत कक्षा पहली में प्रवेश प्रक्रिया की सुस्त रफ्तार पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

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CG RTE Admissions 2026

अब फिर होंगे RTE प्रवेश (फाइल फोटो पत्रिका)

RTE Admission 2026: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत कक्षा पहली में प्रवेश प्रक्रिया की सुस्त रफ्तार पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गंभीर स्थिति को देखते हुए अदालत ने अवकाश के दिन शनिवार को विशेष सुनवाई करते हुए स्वतः संज्ञान लिया और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

RTE Admission 2026: छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई, अधिकारियों को किया तलब

मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई स्थिति को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने शनिवार को ही सुनवाई की। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे विस्तृत हलफनामा पेश करें और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दें। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

सत्र शुरू, लेकिन प्रवेश प्रक्रिया अधूरी

प्रदेश में नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है, लेकिन RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। इससे गरीब और जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब सत्र शुरू हो चुका है, तो बच्चों का दाखिला अब तक क्यों नहीं हो सका।

62% आवेदन ही जांचे गए, हजारों लंबित

आंकड़ों के मुताबिक, RTE के तहत कुल 38,438 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अब तक केवल 23,766 (करीब 62%) की ही जांच पूरी हो सकी है। वहीं 16 हजार से अधिक आवेदन अब भी लंबित हैं। कई जिलों में तो जांच की रफ्तार बेहद धीमी है और 10% से भी कम आवेदन ही सत्यापित किए जा सके हैं।

नोडल वेरीफिकेशन में सुस्ती बनी बड़ी वजह

डीपीआई द्वारा पंजीयन और नोडल वेरीफिकेशन के लिए 16 फरवरी से 31 मार्च तक की समय-सीमा तय की गई थी, लेकिन निर्धारित समय के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। माना जा रहा है कि नोडल प्राचार्यों स्तर पर धीमी जांच इस देरी की मुख्य वजह है, जिससे पूरी प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

लॉटरी प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है असर

नोडल वेरीफिकेशन के बाद 13 से 17 अप्रैल के बीच लॉटरी के जरिए स्कूल आवंटन होना है। हालांकि, यदि जांच और अन्य तैयारियां समय पर पूरी नहीं होती हैं, तो एडमिशन शेड्यूल आगे बढ़ाने की नौबत आ सकती है। इससे हजारों बच्चों के प्रवेश में और देरी हो सकती है।

कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या प्रशासनिक लापरवाही के चलते हजारों बच्चों का भविष्य दांव पर लगाया जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होगी और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

असमान आवेदन और सीटों का संतुलन भी चुनौती

कुछ जिलों में सीटों की तुलना में अधिक आवेदन आए हैं, जबकि कई जिलों में अपेक्षाकृत कम आवेदन दर्ज हुए हैं। इससे भी प्रवेश प्रक्रिया में असंतुलन की स्थिति बन रही है, जिसे संतुलित करना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।

गरीब बच्चों के भविष्य पर मंडरा रहा संकट

RTE के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा का अधिकार दिया जाता है। ऐसे में प्रक्रिया में देरी सीधे तौर पर उनके शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित कर सकती है। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब प्रशासन पर प्रक्रिया तेज करने का दबाव बढ़ गया है।