
यहां है प्रदेश का सबसे प्राचीन लक्ष्मी मंदिर 1179 ईं. से भक्तों के कष्ट दूर करतीं आ रहीं हैं माता लखनी देवी,
बिलासपुर, रतनपुर स्थित लखनी माता का मंदिर बिलासपुर जिले का ही नहीं अपितु पूरे प्रदेश का प्राचीन लक्ष्मी मंदिर है। माता लक्ष्मी भक्तों के दुख दूर करतीं हैं और सुख समृद्धि का आशीर्वाद देतीं हैं। नवरात्रि पर यहां भारी भीड़ रहती है, इसके अलावा धन-धान्य की देवी को प्रसन्न करने दीपावली धनतेरस पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। लखनी देवी अष्टदल कमल पर विराजमान हैं। यह मंदिर रतनपुर-कोटा मार्ग में इकबीरा की पहाड़ी पर मौजूद है। वैसे तो रतनपुर में आधा सैकड़ा से अधिक मंदिर हैं, लेकिन महालक्ष्मी जी के इस प्राचीन मंदिर को लखनी देवी के नाम से जाना जाता है। माता लखनी धन, वैभव, सुख, समृद्धि की देवी कही जाती है।
1178 में छा गया था अकाल, मंदिर बनते ही लौट आईं थी खुशियां:
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण इस मंदिर का निर्माण कल्चुरी राजा रत्नदेव तृतीय के प्रधानमंत्री गंगाधर ने 1179 ई में कराया था। कहा जाता है कि मंदिर निर्माण के एक वर्ष पहले सन 1178 ई. में राजा रत्नदेव तृतीय का राजकोष खाली हो गया था। क्षेत्र में अकाल की स्थिती थी। प्रजा महामारी से जूझ रही थी। कठिन परिस्थिती में राजा रत्नदेव के पंडित गंगाधर ने लक्ष्मी देवी मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर के बनते ही क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि वापिस लौट आई थी।
259 सीढिय़ा चढ़कर जाते हैं श्रद्धालु, माता पूरी करतीं हैं मनोकामनाएं:
लखनी देवी की आराधना करने दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। मंदिर में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां पूजा-अर्चना के लिए जातीं हैं। चैत्र नवरात्री और दीपावली पर माता लक्ष्मी की आशाीर्वाद के लिए भक्तों की लाइनें लगी रहतीं हैं। मंदिर पहाड़ी पर बना हुआ है जहां भक्त 259 सीढिय़ा चढ़कर देवी दर्शन के लिए जाते हैं।
Published on:
10 Apr 2019 09:35 pm

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