बिलासपुर. शहर के युवाओं में शेयर बाजार के प्रति दिन-ब-दिन रुझान बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि स्विंग ट्रेडिंग के तरीके सीख कर स्वयं को इस क्षेत्र में निपुण बना रहे, जिससे ज्यादा से ज्यादा प्रॉफिट लिया जा सके।स्विंग ट्रेडिंग, एक्टिव ट्रेडिंग का एक मानाजाना तरीका है, जिसमें फाइनेंसियल इंस्ट्रूमेंट और मौलिक विश्लेषण दोनों के आधार पर स्विंग ट्रेडर स्टॉक या सिक्योरिटीज को चुनते हैं। जिससे कम जोखिम के साथ उन्हें शॉर्ट टर्म या मध्यवर्ती अवधि के आधार पर अधिकतम रिटर्न मिल सके। जानकारों के मुताबिक स्विंग ट्रेडिंग में पोजीशन को कम से कम रात भर के लिए रखा जाता है, क्योंकि इसमें पोजीशन को इंट्राडे ट्रेडिंग के समान उसी दिन स्क्वायर ऑफ नहीं किया जा सकता। स्विंग ट्रेडर्स, इंट्राडे ट्रेडर्स के समान सिद्धांतों पर काम करते हैं, क्योंकि इसका उद्देश्य शॉर्ट-टर्म प्राइस मूवमेंट से मुनाफा कमाना है। यानी स्विंग ट्रेडिंग डिलीवरी ट्रेडिंग का एक छोटा फॉर्मेट है, जिसमें एक छोटे टाइम पीरियड की रेंज में ट्रेडिंग की जाती है।
तकनीकी और मौलिक विश्लेषण दोनों का उपयोग
ट्रेडर्स आदित्य पाठक के मुताबिक स्विंग ट्रेडिंग में सफल होने के लिए ट्रेडर तकनीकी और मौलिक विश्लेषण दोनों का उपयोग करते हैं। स्टॉक के तकनीकी विश्लेषण का उपयोग प्राइल मूवमेंट का अनुमान लगाने और उन शेयरों का पता लगाने के लिए किया जाता है, जिनमें कम समय में बड़े प्राइज मूवमेंट की क्षमता होती है।
अन्य ट्रेडिंग की तुलना में अधिक रिस्की
एक्सपट्र्स के अनुसार अन्य तरह की ट्रेडिंग की तुलना में स्विंग ट्रेडिंग में ज्यादा रिस्क होता है, क्योंकि इसमें गैप रिस्क शामिल होता है। अगर मार्केट के बंद होने के बाद कोई अच्छी खबर आती हैं तो स्टॉक के प्राइस मार्केट खुलने के बाद अचानक ही बढ़ जाते हैं, लेकिन अगर मार्केट के बंद होने के बाद कोई बुरी खबर आती हैं तो मार्केट खुलने के बाद स्टॉक के प्राइस में भारी गैप डाउन भी देखने को मिलती हैं।
देव प्रजापति, ट्रेडिंग कोच
-स्विंग ट्रेडिंग के दौरान इन बातों पर देना होगा खास ध्यान…
0. रुझान और पैटर्न – स्विंग ट्रेडर्स द्वारा नियोजित पहली रणनीति स्टॉक की कीमतों के रुझान और पैटर्न को समझना है। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि व्यापारियों को ऐसे स्टॉक/संपत्ति मिल सकें जो कीमत में गिरावट या वृद्धि करने जा रहे हैं।
0. ऊपर या नीचे स्विंग – यदि लगता है कि कोई शेयर ऊपर की ओर ‘स्विंग’ करने वाला है, यानी अगले कुछ दिनों में मूल्य वृद्धि का सामना करना पड़ेगा , तो स्टॉक खरीदना चाहिए। इसके गिरने या नीचे की ओर स्विंग होने से पहले वे इसे बेच देना चाहिए।
0.संभावित जोखिमों का आंकलन – इस बात का आंकलन बेहद जरूरी है कि जिस शेयर में निवेश कर रहे हैं, उसमें कितना रिस्क है और क्या वह शेयर रिस्क लेने के लायक है या नहीं।