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सीजे ने जाना सोनू हाथी का हाल पुनर्वास पर निर्णय दो सप्ताह बाद

सोनू हाथी के पुनर्वास को लेकर चल रहा असमंजस समाप्त हो गया है। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान वन विभाग ने हाईकोर्ट को लिखित में रिपोर्ट सौंपते हुए जानकारी दी है कि वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के हाथी विशेषज्ञों की देखरेख में सोनू का पुनर्वास अगले दो महीने में किया जाएगा

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Kajal Kiran Kashyap

Jul 13, 2016

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बिलासपुर.
सोनू हाथी के पुनर्वास को लेकर चल रहा असमंजस समाप्त हो गया है। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान वन विभाग ने हाईकोर्ट को लिखित में रिपोर्ट सौंपते हुए जानकारी दी है कि वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के हाथी विशेषज्ञों की देखरेख में सोनू का पुनर्वास अगले दो महीने में किया जाएगा। 1 दिसंबर 2015 से पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ रायपुर के आदेश के विरुद्ध अचानकमार टाइगर रिजर्व में बंधक बनाकर रखे गए सोनू हाथी को प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने के लिए मंगलवार को वन विभाग ने आखिरकार लिखित में हाईकोर्ट को अपनी सहमति दे दी। वन विभाग ने हाई कोर्ट को बताया कि जंगली दंतैल हाथी को उचित प्राकृतिक रहवासी क्षेत्र में वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के हाथी विशेषज्ञों की सहायता से अगले दो माह के भीतर पुनर्वास किया जाएगा।


ज्ञात हो कि सोनू हाथी का हाल जानने के लिए चीफ जस्टिस दीपक गुप्ता ने स्वयं रुचि लेते हुए अचानकमार का निरीक्षण किया था। दरअसल सोनू हाथी के पुनर्वास के लिए वाइल्ड ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने सहमति दी है। दरअसल डब्ल्यू टीआई ने कई हाथियों का सफलतापूर्वक पुनर्वास कराया है। अरुणाचल प्रदेश में सोनू के समान ही एक पकड़े गए हाथी के बच्चे को जंगल में सफलतापूर्वक पुनर्वास किया गया है। डब्लयूटीआई के सीनियर डायरेक्टर अशरफ ने सोनू हाथी का निरीक्षण 10 जुलाई 2016 को किया था तथा उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ऐसा नहीं है कि कोई हाथी जिसने पहले मनुष्य को मार दिया हो, उसका पुनर्वास नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि सोनू को ट्रेनिंग नहीं दी गई है और उसे हमेशा बांध कर रखा गया है। महावतों ने उसे सिर्फ आज्ञासूचक शब्द उठना, बैठना, खाना जैसे शब्द सिखाए हैं। अगर उसे प्रापर ट्रेनिंग दी जाएगी तो जंगल में सफलता पूर्वक रहने के लिए सक्षम है।


कोर्ट को सौंपे रिपोर्ट में बताया गया है कि पुनर्वास करने से पूर्व सोनू में ट्रांसमीटर लगाया जाएगा जिसे सेटेलाइट के माध्यम से चलाने का सुझाव दिया गया है। जंगल में छोडऩे के पश्चात 2 वर्ष तक विशेषज्ञों की टीम सोनू की मानीटरिंग करेगी व वेटरनरी डॉक्टरों की टीम किसी भी प्रकार की इमरजेंसी से निपटने उस क्षेत्र में रहेगी। सोनू को उस क्षेत्र में छोड़ा जाएगा जहां उसको खाने के लिए घास व पानी प्रचूर मात्रा में उपलब्ध होगा। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।