
बिलासपुर . राष्ट्रीय उद्योग एवं व्यापार मेला जिसकी पहचान अब बिलासुर मेला के नाम से होने लगी है। इस वर्ष कमाई के सभी रिकार्ड ध्वस्त करते हुए महज 5 दिनों में 20 करोड़ से अधिक का कारोबार किया। 12 से 16 जनवरी तक चलने वाले इस 5 दिनी आयोजन में शहर से लेकर दूरस्थ ग्रामीण अंचल के 5 लाख से अधिक लोगों ने मेले का आनंद लिया। मेले की सफलता का आंकलन इसी से लगाया जा सकता है कि बच्चों से लेकर बुजुर्ग, कॉलेज जाने वाली लड़की से लेकर घर संभालने वाली गृहणी तक ने इन पांच दिनों में जमकर ना सिर्फ खरीदारी की, बल्कि जायकेदार व्यंजनों का लुत्फ उठाया। मेले में सांस्कृतिक से लेकर आधुनिक एवं डांस से लेकर आध्यात्मिक सभी प्रकार के आयोजन की व्यवस्था की गई थी। अगर कारोबार की बात करें तो आटोमोबाइल, फर्नीचर, कंप्यूटर, इलेक्ट्रानिक्स से लेकर घरेलू उपयोग के सामानों की जमकर बिक्री हुई। दुकानदारों ने जी खोलकर डिस्काउंट के आफर दिए, 10 से लेकर 20 प्रतिशत तक की अतिरिक्त छूट दी गई। हालांकि डीलरों का कहना है कि जीएसटी ने कारोबार पर असर डाला है। 18 प्रतिशत के टैक्स की मार से कीमतें अपेक्षाकृत अधिक रही। विशेषकर फर्नीचर कारोबारियों का कहना है कि जीएसटी से व्यवसाय पिछले वर्ष की तुलना 30 प्रतिशत कम रही। दीवान, सोफा, बेड मेला के तीन दिनों में ही बिक जाते थे, अतिरिक्त माल मंगाना पड़ता था, पर इस बार नौबत ऐसी है कि कुछ माल वापस दुकान ले जाना होगा।
जबरदस्त भीड़ के बाद भी व्यवस्था चाक-चौबंद: मेला आयोजन समिति को 5 दिनों तक व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए अवश्य प्रशंसा मिलनी चाहिए। किसी भी स्थल पर थोड़ी सी गड़बड़ी या शिकायत मिलने पर वालंटियर तत्काल मौक पर पहुंच जाते थे। चाहे वो कूड़ा इधर-उधर फेंकने का मामला हो या किसी अतिथि को समूचित सम्मान देने का। आयोजकों ने इस मामले में कोई कोताही नहीं बरती। आयोजन स्थल की व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी सदस्य एवं वालंटियर दिन-रात लगे रहे। पूरे एरिया की निरगानी के अलावा 5 लाख लोगों द्वारा फेंके गए कचरे को साफ करना एक चुनौती थी।
केडिया ने की सराहना : मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष हरीश केडिया ने बिलासपुर मेला की सफलता के लिए शहरवासियों को बधाई दी है। कहा है इस तरह के सहयोग से उत्साह में वृद्धि होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है। जो भी कुछ कमियां अगर रह गई होगी, उसे अगले वर्ष दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा सफाई की व्यवस्था बनाए रखने एवं धूल से निपटने के लिए वाटर स्प्रिकलर से नियमित छिड़काव की व्यवस्था की गई, ताकि लोगों को परेशानी ना हो। इस बार मेले में 5 सौ से अधिक स्टाल लगाए गए। इसमें देश की नामी-गिरामी कंपनियों से लेकर स्थानीय लघु एवं कुटीर उद्योग एवं महिलाओं द्वारा हाथ से बने कई आयटम ने लोगों को अपनी ओर लुभाया। मेले में चलने वाले सांस्कृतिक एवं मनोरंजक कार्यक्रम ने भी लोगों का ध्यान आकृष्ट किया। केडिया ने मेले की सफलता के लिए विज्ञापनदाताओं, जिला प्रशासन, नगर निगम, राजनैतिक दल के नेताओं तथा मीडिया को विशेष बधाई दी। नेशनल लेवल पर मेले को चर्चित करने बड़े स्थल की होगी आवश्यकतां: पांच दिनों तक चलने वाले इस मेले को देखने 5 लाख से अधिक लोगों के पहुंचने के बाद आने वाले वर्षों में आयोजकों को आयोजन स्थल छोटा प्रतीत होगा। नेशनल लेवल पर मेले को चर्चित करने के लिए भविष्य में इसे किसी बड़े स्थल पर आयोजन की व्यवस्था करनी होगी। तभी इस मेले को हम राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने में सक्षम हो पाएंगे। हालांकि दबे स्वर में मेले के आयोजन स्थल को लेकर शिकवे-शिकायतों का दौर शुरू हो गया है। व्यापार विहार के व्यापारियों का आरोप है कि मेले के कारण पांच दिनों तक उनका व्यवसाय प्रभावित होता है।
Published on:
17 Jan 2018 11:03 am
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