
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला (Photo source- Patrika)
Bilaspur High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश पर टिप्पणी करने वाले एक अधिवक्ता को अवमानना नोटिस जारी कर 18 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने अपने सामने प्रस्तुत हुए इस मामले को गंभीरता से लिया है और कार्रवाई शुरू की है।
श्यामलाल मलिक बनाम ममता दास मामले में जस्टिस राकेश मोहन पाण्डेय की एकल पीठ द्वारा 3 जुलाई को दिए गए आदेश पर की गई टिप्पणी के आधार पर यह याचिका डिवीजन बेंच में पंजीकृत की गई। उक्त याचिका 3 जुलाई 2025 को एक विस्तृत आदेश द्वारा खारिज कर दी गई थी।
इस दौरान अधिवक्ता सैमसन सैमुअल मसीह, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. निर्मल शुक्ला, तथा प्रतिवादियों के अधिवक्ता वरुण वत्स की इस मामले में अंतिम दलीलें सुनीं गईं और आदेश पारित कर मामला खारिज कर दिया। कोर्ट ने इससे पहले भी पारिवारिक न्यायालय के अधिकार क्षेत्र की कमी का मुद्दा उठाते हुए खारिज कर दिया था।
आदेश पारित होने के बाद, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता, सैमसन मसीह ने खुली अदालत में कहा, मुझे पता था कि मुझे इस पीठ से न्याय नहीं मिलेगा। यह कथन कोर्ट ने अवमाननापूर्ण माना। 10 जुलाई को, प्रशासनिक पक्ष से मामला चीफ जस्टिस के समक्ष प्रस्तुत किया गया और उन्होंने रजिस्ट्री को नियमों के अनुसार अवमानना याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद डिवीजन बेंच के समक्ष प्रकरण सूचीबद्ध किया गया।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस विभुदत्त गुरु की डीबी ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि, रिट याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट सैमसन सैमुअल मसीह ने न्यायाधीश के विरुद्ध खुली अदालत में अपमानजनक टिप्पणी की है। यह एक ऐसे अधिवक्ता के लिए अनुचित है, जो न केवल अपने मुवक्किल के प्रति उत्तरदायी है, बल्कि न्यायालय का एक अधिकारी होने के नाते, नियमों और पेशेवर नैतिकता से भी उतना ही बंधा हुआ है। अधिवक्ता द्वारा कहे गए शब्द अस्वीकार्य हैं और न्यायालय की छवि को धूमिल करते हैं।
Updated on:
14 Jul 2025 03:46 pm
Published on:
14 Jul 2025 03:46 pm
