
बिलासपुर . संक्रमित और ई-कोलाई बैक्टिरिया युक्त पेयजल की आपूर्ति कर लाखों लोगों की जान जोखिम में डालने पर चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन एवं जस्टिस शरद कुमार गुप्ता की युगलपीठ ने बिलासपुर नगर निगम को आड़़े हाथों लिया है। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 243 डब्ल्यू के तहत उत्तरदायित्वों की पूर्ति नहीं करने पर क्यों ना नगर पालिका को भंग करने की कार्रवाई की जाए। युगलपीठ ने कोर्ट कमिश्नरों के सुझावों पर अमल नहीं करने पर गहरी नाराजगी जताते हुए आयुक्त नगर निगम बिलासपुर को महापौर व एमआईसी की सहमति से 16 जनवरी तक मामले की पूरी रिपोर्ट शपथपत्र में देने के लिए कहा है। 17 नवंबर को मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रायपुर के लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता एवं बिलासपुर नगर निगम को निर्देशित किया था, कि तीन सदस्यीय कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की जा रही है। दिए गए सुझावों पर कितना अमल किया जा रहा है। इस पर सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करें। सोमवार को सीजे राधाकृष्णन की युगलपीठ में पीएचई के प्रमुख अभियंता एवं बिलासपुर नगर निगम द्वारा रिपोर्ट पेश की गई।
रिपोर्ट में यह पाए जाने पर कि बिलासपुर नगर पालिका निगम द्वारा कोर्ट कमिश्नरों के अधिकतम सुझावों पर कोई कार्य ही शुरू नहीं किया गया है। यहां तक कि दिए गए सुझावों पर कोई टिप्पणी करने तक की जरूरत महसूस नहीं की गई। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए अब नगर निगम को नोटिस जारी कर कहा है, कि शपथपत्र में विस्तृत रिपोर्ट पेश करें।
क्या है 243 डब्ल्यू : संविधान के अनुच्छेद 243 डब्ल्यू के अंतर्गत नगर पालिकाओं की शक्ति , प्राधिकार और उत्तरदायित्वों की चर्चा की गहई है। इसके तहत कुल 18 बिंदुओं पर नगर पालिकाओं के उत्तरदायित्व बताए गए हैं। इसके अंतर्गत घरेलु प्रायोजनों के लिए स्वच्छ जल प्रदान करना तथा लोक स्वास्थ्य का ध्यान रखना नगर पालिकाओं का दायित्व है। वर्ष 2014 में पीलिया से पत्नी की मौत होने पर रायपुर के दीनदयाल नगर के मुकेश देवांगन ने एक जनहित याचिका दायर की थी। इस पर हाईकोर्ट ने अधिवक्ता सौरभ डांगी, अमृतो दास और मनोज परांजपे को कोर्ट कमिश्रर बनाकर रायपुर और बिलासपुर नगर निगम में पेयजल की स्थितियों पर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।
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नहीं कराई एनएबीएल से पानी की जांच : गौरतलब है कि बिलासपुर नगर पालिका निगम को कोर्ट कमिश्नरों द्वारा नियमित रूप से एनएबीएल अनुमोदित लैब से पेयजल की जांच कराए जाने का सुझाव दिया गया था। लेकिन निगम ने पेयजल की जांच नहीं कराई, बल्कि कोर्ट को यह बताया कि रिपोर्ट आने में काफी समय लगता है। साथ ही पेयजल की जांच करने वाली प्रयोगशाला में स्टाफ की भर्ती किए जाने की सलाह पर निगम ने ये कह दिया कि ऐसी कोई प्रयोगशाला ही यहां नहीं है। पेयजल में क्लोरीन मिलाए जाने की सलाह को भी नजरअंदाज कर कोई टिप्पणी नहीं की गई। नालियों और नालों के बीच में बनाई गई पाइपलाइन के सुधार के संबंध में भी कोई रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की गई। पानी की टंकियों की सुरक्षा के लिए गार्ड की व्यवस्था किए जाने पर बीएमसी ने कहा कि पंप ऑपरेटर ही यह कार्य कर रहा है। साथ ही सीसीटीवी लगाए जाने पर बताया कि टेंडर जारी किया गया है।
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रायपुर नगर निगम ने ये कहा : रायपुर नगर निगम के प्रमुख अभियंता ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट कमिश्नरों के सुझावों पर पेयजल शुद्धिकरण प्लांटों में 20 रिक्त पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति आवश्यक है। प्लांट में सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए हैं, साथ ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कोर्ट कमिश्नरों के सुझाव के अनुसार दुर्ग की शासकीय लैब से पानी की जांच शुरू कराई गई है। भाठागांव एनीकट पर मिल रहे नाले पर 5.62 करोड़ की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लान लगाने के लिए कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा खारून क्षेत्र में मिल रहे नाले पर पानी की सफाई के लिए सूडा ने 331 करोड़ का प्रशासकीय अनुमोदन 20 नवंबर 2017 को दे दिया गया है। साथ ही रायपुर के 50 से अधिक किलोमीटर मुख्य पाइपलाइन को नाली के नीचे शिफ्ट किया जाना प्रस्तावित किया गया है। इस पर 9.68 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। 2014 से नवंबर 2017 के बीच 17.355 किलोमीटर पाइप लाइन नाली के नीचे से शिफ्ट की जा चुकी है। इसके अंतर्गत 6580 घरेलू कनेक्शन शिफ्ट किए जाएंगे।
Updated on:
09 Jan 2018 11:28 am
Published on:
09 Jan 2018 10:44 am

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