
बिलासपुर . जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष मुन्नाराम रजवाड़े और उसके संचालक मंडल के सदस्य ट्रिब्यूनल के आदेश पर बैंक में कामकाज संभाला, लेकिन बैंक के अध्यक्ष संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं के न्यायालय से दिए गए स्थगन आदेश की लगातार अवहेलना कर रहे हैं। एक न्यायालय के आदेश पर बैंक में काबिज होने वाले अध्यक्ष व संचालक मंडल एक अन्य अदालत के आदेश की अनदेखी कर रहे। जेआर न्यायालय के आदेश को अध्यक्ष मानने और नीति गत निर्णय नहीं लेने के आदेश को नकार कर अपनी मनमर्जी से फैसले ले रहे हैं। इन फैसलों को क्रियान्वित कराने की कोशिश में बैंक के कामकाज पर असर पडऩे लगा है। वहीं अधिकारियों व कर्मचारियों में ऊहापोह की स्थिति निर्मित हो गई। सोमवार को जेआर न्यायालय के आदेश पर अवमानना याचिका दायर हो सकती है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में जब से नए अध्यक्ष मुन्नाराम रजवाड़े और संचालक मंडल ने कामकाज संभाला है। उसके बाद भी अध्यक्ष और संचालक मंडल सहकारिता अधिनियम, नियम में उनके मिले अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसले लिए गए । एक माह के भीतर अध्यक्ष ने कई फैसले लिए हैं। इन फैसलों पर न्यायालय संयुक्त पंजीयक केएल ढारगावे ने स्थगन आदेश जारी कर चुके हैं।
रिमोट से संचालित हो रहे अध्यक्ष - बैंक के पूर्व अध्यक्ष पांडेय के इशारे पर फैसले लिए जा रहे हैं, ऐसी बैंक परिसर में चर्चाएं हैं। बैंक के सीईओ अभिषेक तिवारी ने अध्यक्ष रजवाड़े के सभी गलत फैसले को क्रियान्वित करने पर कड़ाई से रोक लगा रखी है, ताकि बैंक की वित्तीय स्थिति डावाडोल न हो सके। दूसरी तरफ अध्यक्ष पूर्व अध्यक्ष के इशारे पर ऐसे फैसले ले रहे, जिससे बैंक की आर्थिक स्थिति रसातल में चली जाए।
20 फरवरी तक मिला है स्थगन आदेश - संयुक्त पंजीयक न्यायालय ने बैंक के सीईओ अभिषेक तिवारी को 20 फरवरी तक स्थगन आदेश दिया है। इसके बाद भी अध्यक्ष ने दूसरी बार नए सीईओ की नियुक्ति करने का आदेश जारी कर दिया गया। इस बार जिस अधिकारी को सीईओ बनाया गया है,उसके खिलाफ नौकरी के लिए तय आयु सीमा को पार करने के बाद नियुक्ति देने की विभागीय जांच चल रही है। इसके साथ ही आर्थिक अनियमितता की भी जांच चल रही है। ऐसे अधिकारी को अध्यक्ष रजवाड़े ने बैंक का नया सीईओ नियुक्त करने का आदेश जारी किया है।
कुछ ऐसा करना चाहते हैं अध्यक्ष - जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र पांडेय के खिलाफ 98 करोड़ के मामले से संबंधित जांच को प्रभावित करने के लिए अध्यक्ष रजवाड़े आदेश निकाल रहे। तीन साल पहले तक करोड़ों के घपले होते रहे हंै, लेकिन प्रशासक बैठने के बाद इस पर पूरी तरह रोक लग गई थी। यह फिर शुरू हो जाए, तीसरा जिन लोगों को गलत तरीके से नौकरी पर रखा गया था, उनकी फिर बैंक में वापसी हो जाए। इन तीन एजेंडों को अघोषित तौर पर बैंक के अध्यक्ष कार्य को पुन: अमलीजामा पहनाने के लिए तत्पर नजर आ रहे हैं।
Published on:
08 Jan 2018 12:28 pm
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