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बच्चों को किट देकर बढ़ाया हौसला, खेल में ‘महारथ’ हासिल करने बताई जरूरी बातें

नरेन्द्र सिंह धोनी ने समर कैम्प में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाडिय़ों को क्रिकेट किट और प्रमाणपत्र का वितरण किया।

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बच्चों को किट देकर बढ़ाया हौसला, खेल में 'महारथ' हासिल करने बताई जरूरी बातें

बिलासपुर . सेकरसा रेलवे ग्राउंड में एसईसीआर खेल संघ के ग्रीष्म कालीन क्रिकेट समर कैम्प के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि खेल संघ महासचिव जे दिगी और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी के बडे भाई नरेन्द्र सिंह धोनी शामिल हुए। उन्होंने बच्चों को अच्छा खिलाडी बनने के गुर बताए। समापन के अवसर पर धोनी की साइन की हुई क्रिकेट किट और प्रमाणपत्र का वितरण किया। रविवार को सेकरसा रेलवे ग्राउंड में आयोजित समर कैम्प के समापन कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के बडे भाई नरेन्द्र सिंह धोनी ने बच्चों को क्रिकेट से जुड़ी बारीकियों को सिखाया। उन्होंने कहा अगर एक अच्छा खिलाड़ी बनना है तो मोबाइल और कम्प्यूटर में कम और मैदान में ज्यादा पसीना बहाना चाहिए, जितना समय खिलाड़ी मैदान में बीताता है, उसकी प्रतिभा में उतना ही निखार कर सामने आती है। नरेन्द्र सिंह धोनी ने समर कैम्प में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाडिय़ों को क्रिकेट किट और प्रमाणपत्र का वितरण किया।
नरेन्द्र सिंह धोनी को अपने बीच पाकर खिलाड़ी और उनके अभिभावक काफी खुश हुए और उनसे ऑटो ग्राफ लेने खिलाडिय़ों के साथ ही उनके अभिभावको का तांता लगा रहा। इस दौरान नरेन्द्र सिंह धोनी के साथ अधिकांश खिलाड़ी सेल्फी भी लेते रहे। कार्यक्रम में विशेष अतिथियों में रमना मूर्ति, जी रघु मौर्य,आलोक श्रीवास्तव, टाटा सर, देवराजन सहायक खेल अधिकारी मौजूद रहे। इस खेल प्रशिक्षण शिविर में प्रवीण कुमार, रोहित ध्रव, अभिषेक सिंह, अभिनव शर्मा, अतुल शर्मा, ओपी यादव, भूपेंद्र पांडे, के श्रीनिवास राव, प्रफु ल्ल मसीह, प्रहलाद ,श्याम और घनश्याम बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे थे।

शहर में खेलते थे धोनी : भारतीय टीम में चयन के बाद जब रांची में खेलने के लिए मैदान उपलब्ध नहीं हो रहा था तो एमएस धोनी बिलासपुर के सेकरसा ग्राउंड में प्रैक्टिस करने १० दिन के लिए पहुंचे। वह रेलवे क्वार्टर में रहकर प्रैक्टिस करते थे। उनके बचपन के दोस्त विजय कुमार सिंह उनका साथ देते थे विजय ने बताया कि माही और वह बचपन से क्रिकेट खेलते थे। दोनों रंणजीत ट्राफी और इंडिया कैम्प में साथ खेल दोनों ने साथ ही रेलवे की नौकरी भी ज्वाइन की थी। धोनी पहले जैसे थे आज भी वैसे ही हैं।

माही की मेहनत रंग लाई-नरेंद्र : सेकरसा रेलवे क्रिकेट ग्राउंड में चल रहे समर कैम्प के समापन कार्यक्रम में शमिल होने पहुंचे भारतीय क्रिकेट टीम पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के बड़े भाई ने पत्रिका से खास बातचीत में बताया कि वह क्रिकेट को प्रोफेसनली तो नहीं, लेकिन सौखिया तौर पर जरूर खेलते हैं और इस खेल को बारिकी से समझते हैं। नरेन्द्र सिंह धोनी से जब पूछा गया कि महेन्द्र सिंह धोनी किस तरह मेहनत करते थे, क्रिकेट में कितना समय देते थे। इस सवाल पर नरेन्द्र धोनी ने कहा माही बचपन से ही काफी मेहनती और परिश्रमी हैं, वह क्रिकेट में रोजाना सुबह शाम ढाई से तीन घंटे बीताते थे। उसे क्रिकेट गार्ड गिफ्टेड कहा जा सकता है लेकिन उसकी सफलता का राज उसकी मेहनत और लग्न ही है। साथ ही कहा कि वह रेलवे का धन्यवाद देना चाहते है क्योकी रेलवे ही है जो खिलाडिय़ो को मौका देता है उन्हे खेलने प्रोत्साहित करता है कभी किसी खिलाडी को खेलने से नहीं रोकता और उन्हे जो परेशानी आती है उसे दूर करने का पूरा प्रयास भी करता है

चाहे वह रांची हो या फि र बिलासपुर : क्या वह भी क्रिकेट खेलते हैं या उन्हें कोई और खेल में दिलचस्पी है इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा वह स्कूल के समय में फुटबॉल खेला करते थे। और कभी कभी सौखिया तौर पर क्रिकेट भी खेल लेते थे। उनका शुरू से रूझान फुटबॉल पर ही रहा मैने सुब्रतो कप का फाइनल मैच खेला। बुमला टी के साथ बंगाल में, डीएवी नेशनल में हमारी टीम ३ साल विजेता रही। उसके बाद अगे की पढ़ाई के लिए अलमोड़ा चला गया, धीरे धीरे यह खेल भी छुट गया। अभी मै एक बिजनेस मैन हूं और सरकारी ठेका और प्राप्रर्टी का काम कर रहा हूं। उन्होंने बताया कि वह बिलासपुर पहली बार पहुंचे हैं। इससे पहले वह २ साल पहले जशपुर में जुदेव स्मृति में हुए फुटबॉल आयोजन में पहुंचे थे अम्बिकापुर घूमने भी आ चुके हंै। २००७ में इंडिया ने पहली बार हुए २०-२० मैच में वल्र्ड कप महेन्द्र सिंह धोनी के नेतृत्व में जीता और फिर २०१५ का वल्र्ड कप उस दौरान कैसा लगा इस पर नरेन्द्र सिंह धोनी ने बताया कि जब धोनी की कप्तानी में इंडिया ने २०-२० का वल्र्ड कप जीता उस क्षण को शब्दों में बया करना काफी मुश्किल है। उनका घर चारों ओर से घिरा हुआ था लोग बधाई देने पहुंचे हुए थे।