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CG Breaking तुर्काडीह पुल घोटाले का इंजीनियर गिरफ्तार, दो साल से था फरार

साल 2016 में ही एसीबी और ईओडब्लू की टीम ने न्यायालय में चालान पेश कर दिया था।

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hatkadi

बिलसपुर. एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीम ने पीडब्ल्यूडी अस्टिटेंट इंजीनियर आरके वर्मा को मुखबिर की सूचना पर रामावैली से गिरफ्तार कर लिया है। वर्मा के खिलाफ तुर्काडीह पुल घोटाले में 2016 में कोर्ट में चालान दाखिल किया गया था। मालूम हो कि न्यायालय ने तुर्काडीह पुल निर्माण में घोटाले पर पीडब्लूडी अधिकारी और ठेका कंपनी संचालकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। साल 2016 में ही एसीबी और ईओडब्लू की टीम ने न्यायालय में चालान पेश कर दिया था। इसके बाद सभी आरोपी फरार थे। रायपुर से अम्बिकापुर बायसपास जाने के लिए बिलासपुर के अरपा नदी पर तुर्काडीह गांव में पुल निर्माण किया गया। पुल निर्माण को करीब 3 से 4 करोड़ रूपए में बनाया गया। पुल निर्माण का मुख्य उद्देश्य भारी वाहनों को शहर में प्रवेश होने से रोकना था। साल 2007 में निर्माण के बाद तुर्काडीह पुल को यातायात के लिए बहाल किया गया।

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लेकिन निर्माण होने के पांच साल बाद पुल दरार आ गयी थी। काफी मरम्मत के बाद पुल आवागमन के लिए एक बार फिर खोला गया। लेकिन दरार फिर भी आ गयी। इसके बाद करीब ढाई साल के लिए पुल को आवागमन के लिए बंद कर दिया गया। साढ़े 3 करोड़ की लागत से बने इस पुल को दोबारा तैयार करने में शासन ने 3 करोड़ अतिरिक्त राशि खर्च किया। पुल जर्जर होने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए जांच का आदेश दिया। एसीबी ने जांच कर तत्कालीन ईई एससी खंडेलवाल, लोक निर्माण विभाग प्रभारी अधीक्षण यंत्री, सब इंजीनियर आरके वर्मा और सुदंरानी कंस्ट्रक्शन के डायरेक्टरों के खिलाफ जुर्म दर्ज किया गया। मामले को विशेष न्यायालय में पेश कर चालानी कार्रवाई की गयी। चालानी कार्रवाई के बाद कोर्ट से आरोपियों को उपस्थित होने के लिए नोटिस भेजा गया। बावजूद इसके आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं हुए। न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। इसके बाद एसीबी और ईओडब्लू को आरोपियों की तलाश तेज कर दी। ईओडब्लू ने वर्मा को कोर्ट में पेश कर दिया है। अगली सुनवाई में आरोपियों को पेश करने का आदेश दिया गया है।

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