
बिलासपुर . शहर की पहचान माना जाने वाला चांटीडीह के मेले की शुरुआत मंगलवार को हुई। लगभग 80 साल पुराने इस मेले में लोक संस्कृति के साथ ही प्रदेश की सभ्यता की झलक साफ देखने को मिलती है। महाशिवरात्रि में मंदिर दर्शन व पूजन के लिए पहुंचे लोग पूजा-अर्चना के साथ ही मेले का आनंद लेते नजर आए। सुबह से शाम तक मेले में लोग पहुंचे। जहां पर जलेबी, उखरा व मसूर पाग जैसे पारंपरिक चीजों की खरीदारी भी करते रहे।
सोनी परिवार द्वारा शुरू किया गया मेले की भव्यता समय के साथ बढ़ती जा रही है। मेले में पारंपरिक झूले घोड़ा व कुर्सी झूला के साथ ही आधुनिक झूला ब्रेक डांस, हवाई झूला, ड्रेगन जैसे कई झूले मेले में आए है। जिसका आनंद सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि बड़े भी लेते नजर आए। मेला आयोजन समिति के शंकर सोनी ने बताया कि इस मेले में प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से आए व्यापारी भी शामिल हुए है। जहां पर लोक रंग के साथ ही प्रदेश की सभ्यता व संस्कृति भी नजर आ रही है।
बैंड वालों ने चढ़ाया ध्वज : चांटीडीह मेले में महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रजापति समाज द्वारा व बैंड बाजे वालों ने ध्वज अर्पित किया। प्रजापति समाज के सदस्यों ने तालापारा से बाजे-गाजे के साथ भव्य ध्वज शोभायात्रा निकाली। शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए शोभायात्रा चांटीडीह मेला पारा स्थित शिव मंदिर पहुंची। जहां पर पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर में ध्वज अर्पित किया गया। इस दौरान श्रद्धालु भजन गाते व महादेव के जय-जयकार करते हुए पहुंचे।
शिव में सृजन व संहार की क्षमता-ब्रह्मकुमारी स्वाति : भारतीय जनमानस में मान्यता है कि शिव में सृजन और संहार की क्षमता है। उनकी यह भी मान्यता है कि शिव आशुतोष है अर्थात जल्दी और सहज ही प्रसन्न हो जाने वाले है। इसी भावना को लेकर वे शिव पर जल चढ़ाते और उनकी पूजा करते हंै। परंतु हमें अपने से पूछना है कि जीवन भर नित्य शिव की पूजा करते रहने पर भी तथा हर वर्ष श्रद्धापूर्व? शिवरात्रि ?? पर जागरण, व्रत इत्यादि करने पर भी हमारे पाप एवं संताप क्यों नहीं मिटते। यह बातें मंगलवार को ब्रह्मकुमारी सेंटर टेलीफोन एक्सचेंज रोड में ब्रह्मकुमारी स्वाति ने लोगों से महाशिवरात्रि के अवसर पर कही।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थानीय शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन द्वारा 82वीं शिव जयंती मंगलवार को मनाई गई। शाखा की संचालिका ब्रह्मकुमारी स्वाति ने शिव रात्रि के विषय में बताया। उन्होंने शिवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए कहा कि शिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अंतिम रात्रि से एक दिन पहले मनाई जाती है। परमपिता परमात्मा शिव का अवतरण इस लोक में कलियुग के पूर्णान्त के कुछ समय पहले हुआ था जबकि सारी सृष्टि अज्ञान अंधकार में थी। इसलिए शिव का संबंध रात्रि से जोड़ा जाता है और परमात्मा शिव की रात्रि में पूजा को अधिक महत्व दिया जाता है क्योकि परमात्मा शिव ने अवतरित होकर तमोगुण और पापाचार का विनाश करके दु:ख और अशांति को हरा था। ब्रह्मकुमारी स्वाति बहन ने सभी भाई-बहनों से संकल्प करवाया कि मधुर बोल और व्यवहार द्वारा मिलनसार बन आपस में संस्कार मिलन करेंगे। अपने हर संकल्प, श्वास, समय और शक्ति रूपी खजाने को सफल कर सफलता स्वरूप बनेंगे। परिवर्तन की शक्ति से हर निगेटिव संकल्प को पाजिटिव में चेंज करेंगे।
शिवदर्शन मेले में पहुंच रहे श्रद्धालु : महाशिवरात्रि के अवसर पर सीएमडी कॉलेज मैदान में आयोजित की शिवदर्शन मेले में लोग महादेव के 12 ज्योर्तिलिंगों के दर्शन करने पहुंच रहे है। शाम को साढ़े सात बजे महाआरती का कार्यक्रम किया गया।
Published on:
14 Feb 2018 05:57 pm
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