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थैलेसीमिया-सिकलसेल मरीजों का सिम्स में शुरू हुआ फास्ट ट्रैक इलाज

कोरोनाकाल से पहले आयुर्विज्ञान संस्थान सिम्स में थैलेसीमियां व सिकलसेल के मरीजों का फास्ट टै्रक इलाज होता था।

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Fast track treatment of thalassemia-sickle cell patients started in Si

Fast track treatment of thalassemia-sickle cell patients started in Si

बिलासपुर.कोरोनाकाल से पहले आयुर्विज्ञान संस्थान सिम्स में थैलेसीमियां व सिकलसेल के मरीजों का फास्ट टै्रक इलाज होता था। उसके बाद कोरोना के मरीजों का प्राथमिकता दिए जाने से यह प्रक्रिया बंद हो गई थी, अब फिर से शुरू हो गई है। इसका लाभ ऐसे हर मरीजों को मिलने लगा है।
आयुर्विज्ञान संस्थान सिम्स में वर्ष 2019 तक थैलेसीमियां व सिकलसेल के पीडि़तों के इलाज व ब्लड चढ़वाने के मद्देनजर फास्ट टै्रक प्रक्रिया थी। इसके माध्यम से मरीज का तत्काल चेकअप होने के साथ ही ब्लड चढ़ा दिया जाता था। कोरोनाकाल में यह प्रक्रिया बंद हो गई थी, जिसके चलते मरीजों को हर बार अपना पंजीयन कराने के साथ ही ओपीडी के चक्कर लगाने व अन्य औपचारिकताओं को पालन करना पड़ रहा था। इससे उन्हें दिन भर का समय लग जाता है। ऐसे में बच्चे सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं। उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही थी। मरीजों के बार-बार आग्रह पर आखिरकार प्रबंधन ने एक बार फिर से यह प्रक्रिया शुरू कर दी है। बतादें कि थैलेसीमियां व सिकलसेल से पीडि़तों को सिम्टम्स वाइज हर सप्ताह या फिर महीने में दो से तीन बार ब्लड चढ़वाना पड़ता है। लिहाजा रूटीन के तहत उन्हें अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में फास्ट ट्रैक इलाज इनके लिए सहूलियत प्रदान करने वाला है। बतादें कि जिले में 400 से अधिक थैलेसीमिया तो ढाई हजार से ज्यादा सिकलसेल के मरीज हैं। सभी का इलाज सिम्स में चल रहा है।
बाक्स...
0 सिम्स पैथोलैब की थी पहल
सिम्स पैथोलैब की विशेष पहल पर फास्ट ट्रैक सिस्टम अपनाया गया था। इसके तहत इस बीमारी से संबंधित मरीजों का एक कार्ड बना दिया गया था, इसे दिखाने पर हर बार रजिस्ट्रेशन नहीं कराना पड़़ता था। साथ ही अस्पताल पहुंचने पर अलग से डॉक्टरों की टीम वार्ड में तत्काल इनका चेकअप कर ब्लड चढ़वाते थे। वर्तमान में इनका कार्ड तो नहीं बना है, पर ऐसे मरीजों का तत्काल इलाज हो जा रहा है।
वर्जन...
सिकलसेल व थैलेसीमिया के मरीजों को महीने में कई बार चेकअप के साथ ब्लड चढ़वाने अस्पताला आना पड़ता है। उन्हें परेशानी न हो, इसलिए फास्ट ट्रैक प्रक्रिया अपनाते हुए इनके इलाज को प्राथमिकता दी जा रही है। कोरोनाकाल में इनके इलाज को लेकर थोड़ी व्यवधान जरूर आया था, अब सब पहले जैसा हो गया है।
डॉ. नीरज शेंडे, एमएस सिम्स।
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