
फर्जीवाड़ा (photo-patrika)
Bilaspur Forest Department Scam: बिलासपुर जिले के मरवाही वनमंडल में फर्जी प्रमाणक तैयार कर शासन को 8.14 लाख रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने के मामले में विभागीय जांच में अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। उप वनमंडलाधिकारी, बिलासपुर द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में तत्कालीन परिक्षेत्र अधिकारी मरवाही रमेश खैरवार तथा कैम्पा शाखा प्रभारी (व्यय-2) भूपेन्द्र कुमार साहू को प्रथमदृष्ट्या दोषी माना गया है।
रिपोर्ट में दोनों अधिकारियों के विरुद्ध गई है। एफआईआर दर्ज कराने, कठोर विभागीय कार्रवाई करने तथा गबन की राशि की वसूली की अनुशंसा की गई है।
जांच में कैम्पा शाखा प्रभारी भूपेन्द्र कुमार साहू की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। उन्होंने दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का सत्यापन किए बिना भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाई, फर्जी दस्तावेजों को आवक जावक रजिस्टर में दर्ज कराया तथा वनमंडलाधिकारी की जानकारी के बिना एलओसी तैयार की। जांच अधिकारी ने उल्लेख किया है कि दोनों अधिकारियों के विरुद्ध पहले भी फर्जीवाड़ा एवं धोखाधड़ी के एक अन्य मामले में निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। वर्तमान मामले में कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
जांच रिपोर्ट में मार्च 2025 में अपात्र व्यक्तियों को किए गए पूरे भुगतान की राशि रमेश खैरवार और भूपेन्द्र कुमार साहू से वसूलकर शासकीय खाते में जमा कराने की अनुशंसा की गई है। साथ ही दोनों अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्रवाई (Bilaspur Forest Department Scam) करने की भी सिफारिश मुख्य वन संरक्षक को भेजी गई है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता दिनेश पाण्डेय की शिकायत पर विस्तृत जांच की गई। जांच में सामने आया कि बिना कार्य कराए फर्जी प्रमाणक तैयार किए गए और तत्कालीन उप वनमंडलाधिकारी पेंड्रा तथा परिक्षेत्र अधिकारी के कूटरचित हस्ताक्षरों का उपयोग कर मार्च 2025 में 8 लाख 14 हजार 778 रुपये अपात्र व्यक्तियों के खातों में स्थानांतरित कर दिए गए। जांब में यह भी पाया गया कि तत्कालीन परिक्षेत्र अधिकारी रमेश खैरवार ने दिसंबर 2024 में फर्जी प्रमाणक तैयार किए। उन्हें कई बार नोटिस जारी किए गए।
जांच रिपोर्ट ने मरवाही वनमंडल में हुए 8.14 लाख रुपये के कथित गबन और फर्जीवाड़े की गंभीरता को उजागर किया है। रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर, विभागीय कार्रवाई और गबन की राशि की वसूली की सिफारिश की गई है। अब अंतिम निर्णय और आगे की कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जाएगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Updated on:
11 Jul 2026, 6:06 PM IST
Published on:
11 Jul 2026, 5:28 PM IST
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