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विवेकानंद का अनुसरण राष्ट्र की प्रथम आवश्यकता-शुक्ला

सरस्वती शिशु मंदिर में राष्ट्रीय युवा दिवस पर व्याख्यान का आयोजन

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स्वामी विवेकानंद के ये वचन जिंदगी की किसी भी चुनौती पर दिला सकते हैं जीत

बिलासपुर. स्वामी विवेकानंद जयंती यानी राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर आज देशभर में विभिन्न कार्यक्रम किए गये स्वामी विवेकानंद को लोग आज याद कर रहे हैं और उन्हें अपनी श्रद्घांजिल अर्पित कर रहे हैं। स्वामी विवेकानंद भारत के महानतम धर्म गुरुओं में से एक हैं। स्वामी विवेकानंद का जीवन और उनका संदेश व प्रवचन को दुनिया में लाखों लोगों को प्रभावित किया है। वह विद्वता और प्रेरणा के बड़े श्रोत माने जाते हैं। वह अपने धार्मिक ज्ञान से किसी के भी दिल में जगह बनाने और अपने शक्तिशाली विचारों तर्कयुक्त विचारों से किसी के भी सोचने का नजरिया बदलने की क्षमता रखते थे। उनकी इसी प्रभावशाली आभा और दुनिया में भारत की एक अलग पहचान बनाने के लिए देश उन्हें उनकी जयंती पर नमन करता है। स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। और इसी मौके पर सरस्वती शिशु मंदिर बिलासपुर में आज भारत माता की सेवा में संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले युग ऋषि स्वामी विवेकानंद की जन्म जयंती पर “स्वामी विवेकानंद के विचारों का अपहरण”विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसमें सभी ने उनकी विचारो को गति देने पर प्रकाश डाला प्रथम में गुरुकुल के संस्थापक ब्रजेन्द्र शुक्ला ने अपनी चिरपरिचित शैली में स्वामी विवेकानंद के विचारों को राष्ट्र हित के लिए सर्वोपरि का एक उच्य माध्यम बताते हुए कहा कि आज देश की आवश्यकता उन्ही के मार्गदर्शन पर चलने की है और हम सभी देश वासियों को उनके पदचिन्हों पर चलना चाहिए क्योंकि हमारा राष्ट्र ही हमारा प्रथम उद्देश्य है। वर्तमान गतिविधियों पर अंकुश लगाने में स्वामी जी के विचारों का अनुसरण करना बेहद आवश्यक है और आज की इस व्याख्यान मे आप सभी से मेरा विन्रम निवेदन है कि इस आयोजन के मुख्य वक्ता को आप सिर्फ सुने ही नही वरन उन विचारों पर चलने का भी प्रयत्न करें स्वामी जी ने अपने विचारों से सामाजिक के अलावा विज्ञान तथा आर्थिक प्रयासों में भी राष्ट्र को योगदान दिया हम उनके विचारों को क्षणिकमात्र भी अपने जीवन मे यदि उतार लें तो ये आप निश्चित मानिये हमारे जीवन मे सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था में एक नया मोड़ आ जायेगा। कार्यक्रम के दूसरे अध्याय में अशोक दामोदर राव मोदक ने स्वामी जी की खूबियों और उनके जीवनकाल के सभी पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किये इसी कड़ी में कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ कर्नल सुजल सेन व विशिष्ट अतिथि में काशीनाथ गोरे,ओ.पी चौधरी प्रकाश ग्वालानी ने भी स्वामी जी के पदचिन्हों पर चलने की बात कही। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मुख्यवक्ता अशोक दामोदर राव मोदक कुलाधिपति गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (वरिष्ठ शिक्षाविद)तथा अध्यक्ष डॉ कर्नल सुजल सेन (मुख्यकार्यपालन अधिकारी अपोलो) विशिष्ट अतिथि काशीनाथ गोरे (वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता) और विशिष्ट अतिथि ओ.पी.चौधरी (पूर्व आई.ऐ. एस.) एवं विशिष्ट अतिथि प्रकाश ग्वालानी (बिल्डर्स एवं प्रमोटर रामा वेली ग्रुप) के अलावा नगर के प्रबुद्धजन उपस्तिथ रहे।

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