
ट्रेन दुर्घटना में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए ध्यान कराया गया
बिलासपुर. प्रजापिता ब्रह्माकुमारी टिकरापारा सेवा केंद्र के हार्मनी हॉल में चल रहे उड़ान बाल संस्कार शिविर के चौथे दिन सत्र की शुरुआत में ओम ध्वनि व ध्यान का अभ्यास कराने के बाद स्वच्छता का महत्व बताया गया। बीके श्यामा ने कहा कि स्वच्छता मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं बाह्य स्वछता व आंतरिक स्वच्छता।
बाह्य स्वच्छता यानी स्वयं के शरीर को स्वच्छ रखना, स्वच्छ कपड़े पहनना, घर की हर एक वस्तु सुव्यवस्थित रखना अपने आसपास के वातावरण को भी स्वच्छ बनाए रखें। अस्वच्छता से अनेक प्रकार की बीमारियां होती है। आंतरिक स्वच्छता यानी मन हमारा निर्मल हो साफ हो किसी के प्रति ईष्र्या, घृणा, द्वेष जैसी किसी भी प्रकार की बुराइयां हमारे मन में ना हो, हर एक के प्रति प्रेम और सहयोग की भावना हो।
मेहनत का फल मीठा होता है
बीके नीता ने एक कहानी के माध्यम से बताया कि मनुष्य को हमेशा परिश्रम करते रहना चाहिए, क्योंकि परिश्रम का फल बहुत मीठा होता है और सफलता निश्चित मिलती है।
धैर्यता सफलता दिलाती है
बीके गौरी ने धैर्यता की सीख देने वाली कहानी बताकर उसका प्रैक्टिकल प्रयोग कराया। कहा कि भले ही होशियार न हो लेकिन धैर्यता के गुण से बड़ों-छोटों सभी की दुआएं मिलती हैं जो स्वत: ही हमें सफलता दिलाकर आगे बढ़ाती हैं। उन्होंने बच्चों को 'समय का ये कहना है' कविता के माध्यम से समय का महत्व बताया। इयस बीच ओडिशा में हुई ट्रेन दुर्घटना में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए बच्चों को ध्यान कराया।
नियमित दिनचर्या का पालन जरूरी
कार्यक्रम के अतिथि पतंजलि के जिला प्रभारी डॉ. केके श्रीवास्तव ने कहा कि हमें स्वस्थ्स रहने नियमित दिनचर्या का पालन करना चाहिए। सभी दोपहर का भोजन राजा की तरह अच्छे से व रात्रि का भोजन भिखारी की तरह यानी बहुत कम करें। दिनभर में शाम 5 बजे से पहले तक पर्याप्त पानी पीयें और जितना हो सके गुनगुना पानी लें और सिप सिप करके पीएं। भोजन हमेशा शुद्ध और शाकाहारी करें।
Published on:
05 Jun 2023 12:12 am
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