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दुष्कर्म पीडि़ताओं की सुनवाई में गाइड लाइन को लेकर याचिका पर सुनवाई 4 सप्ताह बाद

सुनवाई: दुष्कर्म पीडि़ता का बयान वीडियो कांफ्रेंसिग से लेने की गुहार
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बिलासपुर

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Anil Kumar Srivas

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Updated: 6 Sep 2018, 4:46 PM IST

high court

दुष्कर्म पीडि़ताओं की सुनवाई में गाइड लाइन को लेकर याचिका पर सुनवाई 4 सप्ताह बाद

बिलासपुर. दुष्कर्म पीडि़ताओं की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन नहीं किए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की युगलपीठ में बुधवार को की गई। याचिकाकर्ता की ओर से मांग की है गई कि ऐसे मामलों की सुनवाई में पीडि़ता का बयान वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए लिया जाए, ताकि उनकी पहचान सार्वजनिक ना हो बल्कि गुप्त रह सके। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन होने या नहीं होने के संबंध में शासन से जबाब तलब किया है। मामले की आगामी सुनवाई अब 4 सप्ताह बाद होगी। ज्ञात हो कि जांजगीर-चांपा की सामाजिक कार्यकर्ता संतरा बाई काठे और बिंदेश्रवरी बाई ने नाबालिगों के साथ होने वाले दुष्कर्म की विवेचना और सुनवाई में सुको की गाइड लाइन का पालन नहीं किए जाने को लेकर याचिका लगाई है। मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता जेके शास्त्री और मीना शास्त्री ने राज्य शासन, छग हाईकोर्ट और स्टेट बार काउंसिल को पक्षकार बनाया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई में स्टेट बार काउंसिल ने अपना जवाब पेश कर बताया है कि सुको के निर्देश का पालन करने के संबंध में सभी अधिवक्ता संघों को आदेश की प्रति भेजी गई है। इसके अलावा अधिवक्ताओं को भी निर्देशित किया गया है कि ऐसे प्रकरणों की सुनवाई में पीडि़ताओं से सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार ही प्रश्न पूछे जाएं।

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मीना शास्त्री ने कोर्ट को बताया कि सुको ने दो महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। पहला ये कि सभी जिला न्यायालयों में जुवेनाइल पुलिस यूनिट का गठन हो और दूसरा ये कि नाबालिग पीडि़ताओं का वीडियो कांफ्रेङ्क्षसग से ही ट्रायल के दौरान बयान लिया जाए।

क्या हैं सुको के निर्देश
सुको की गाइड लाइन के अनुसार, नाबालिग पीडि़ताओं का बयान वीडियो कांफ्रेङ्क्षसग के जरिए ही लिया जाना है। बयान के वक्त पहचान गुप्त रखने के लिए चेहरा ढंका होना चाहिए। साथ ही अधिवक्ताओं को ऐसे सवाल पूछने की इजाजत नहीं होगी, जिससे उसके चरित्र पर संदेह हो। महिला पुलिस अधिकारी को पीडि़ता का बयान लेने और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।