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World Heart Day : स्मार्ट वाच जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर करें अपने हार्ट की हेल्थ को मॉनिटर, बच सकती है जान

World Heart Day :वर्तमान परिवेश में अनियमित दिनचर्या से लोग हार्ट की बीमारी के शिकार हो रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक हार्ट से जुड़ी बीमारी लाइफ स्टाइल से जुड़ी समस्या है।

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World Heart Day : स्मार्ट वाच जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर अपने हार्ट की हेल्थ को मॉनिटर, बच सकती है मरीज की जान

World Heart Day : स्मार्ट वाच जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर अपने हार्ट की हेल्थ को मॉनिटर, बच सकती है मरीज की जान

बिलासपुर. वर्तमान परिवेश में अनियमित दिनचर्या से लोग हार्ट की बीमारी के शिकार हो रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक हार्ट से जुड़ी बीमारी लाइफ स्टाइल से जुड़ी समस्या है। इंसान अपने जीवन में जितना एक्टिव रहता है, स्ट्रेस फ्री लाइफ जीता है और नशीले पदार्थों से दूर रहता है उसे हृदय रोग होने का चांस उतना ही कम रहता है। मगर कुछ मामलों में एक्टिव रहने वाले लोग भी इसके चपेट में आ जाते हैं। इसमें मानसिक तनाव प्रमुख कारण है।

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डॉक्टरों के अनुसार ओपीडी में कई ऐसे केस देखने को मिलते हैं, जहां शारीरिक रूप से फिट मरीज सीने में दर्द को काफी हल्के में लेता है। कई मामलों में उसे गैस कह कर टाल भी देता है। ऐसा करना उसके लिए लिए घातक हो सकता है।

हार्ट फेलियर या हार्ट अटैक जैसी घातक स्थिति से बचने के लिए अर्ली सिम्टम्स की जांच कराना बेहद जरूरी है। इधर बीते सालों में मेडिकल साइंस ने न सिर्फ दवाओं के मामले में, बल्कि तकनीकी मामलों में भी काफी उन्नति की है, जिसके माध्यम से आज वर्तमान में पहले की तुलना में बीमारियों को शुरुआती स्टेज में पकड़ उसका इलाज शुरू हो जा रहा है।

ओपन हार्ट सर्जरी का घटा चलन

वर्तमान में ओपन हार्ट सर्जरी के बदले एमईएस (मिनिमल इनवेसिव टेक्निक) का इस्तेमाल कर हार्ट का ऑपरेशन किया जा रहा है। इससे मरीज ऑपरेशन के बाद कुछ ही दिनों में अपने रोजमर्रा के सारे काम करने की स्थिति में पहुंच जाता है। हाल ही में बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में 90 वर्ष की महिला का सफल हार्ट सर्जरी की गई थी।

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वहीं इसके अलावा आज स्मार्ट वाच जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर अपने हार्ट की हेल्थ को मॉनिटर किया जा सकता है। वहीं एडवांस पेसमेकर जैसे यंत्रों का इस्तेमाल कर मरीज को स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

समय के मूल्य को समझें

हार्ट अटैक का मतलब हार्ट की नसों का ब्लॉकेज होता है। इसकी वजह से हार्ट की मांसपेशियों को खून नहीं मिल पाता और उनकी कोशिकाओं की मृत्यु होने लगती है। हार्ट अटैक के पहले 6 घंटे गोल्डन पीरियड कहलाता है। इस समय हार्ट की नसों में दोबारा रक्त संचार शुरू करने और अवरोध हटा देने से न सिर्फ मरीज की जान बचाई जा सकती है, बल्कि हार्ट की मांसपेशियों को लगभग सामान्य स्थिति लाई जा सकती है। अत: जैसे ही सिम्टम्स दिखें तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।