
High Court : महंगी दवा लिखने वाले डॉक्टर ध्यान से पढ़ें, हाई कोर्ट ने दिया 4 सप्ताह का समय, नहीं सुधरने पर हो सकती कार्रवाई
बिलासपुर . छत्तीसगढ़ के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टर मरीजों के लिए जेनरिक दवाइयां नहीं लिख रहे हैं। इस मामले में दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इण्डिया और केंद्र सरकार से 4 सप्ताह में जवाब मांगा है।
कोरबा के आरटीआई एक्टिविस्ट लक्ष्मी चौहान ने अधिवक्ता संजय कुमार अग्रवाल के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में बताया गया कि, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने सेवारत डॉक्टरों के लिए जेनरिक दवाइयां लिखना अनिवार्य कर दिया है।
फिर भी इस आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। इससे पहले हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दस सप्ताह में जवाब मांगा था। याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने 2016 में डॉक्टरों को जेनरिक दवाइयों की अनिवार्यता के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए।
इसके बाद 21 अप्रैल 2017 को नोटिफिकेशन जारी किया था इसके अनुसार सभी शासकीय और प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों को जेनरिक दवाइयों का फार्मूला केपिटल लेटर्स में लिखने का प्रावधान है। इसके साथ ही जेनरिक दवाइयां उपयोग करने के भी निर्देश हैं।
इसके बाद भी राज्य के सरकारी और प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन में जेनरिक दवाइयां नहीं लिख रहे हैं। याचिका में छत्तीसगढ़ में जेनरिक दवाइयों को अनिवार्य करते हुए राज्य शासन को आदेशित करने की मांग की गई है। शुक्रवार को चीफ जस्टिस की डीबी ने सुनवाई के बाद केंद्र व एमसीआई को 4 सप्ताह के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
Published on:
19 Aug 2023 01:33 pm

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