बिलासपुर. बदलती टैक्स नीति और जीएसटी के लागू होने के बाद से सीए प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ़ गई है। यही वजह है इस सेक्शन मे अच्छा स्कोप देखते हुए युवा अपना कॅरिअर बनाने जुट गए हैं। १० वीं पास करने के बाद अभिभावक अपने बच्चों को कॉमर्श सब्जेक्ट लिवा रहे, ताकि आगे चल कर वे सीए बन सकें।
जीएसटी लागू होने के बाद से बड़े फर्मों के साथ ही साथ छोटे फर्म व स्माल बिजनेस मैन को रिटर्न फाइल या जीएसटी फाइल करने के लिए सीए की जरूरत पढ़ रही है। शहर के सीए अंशुमान जाजोदीया ने बताया कि मौजूदा समय में देश में 3 लाख चार्टेड अकॉउंटट ही हैं, जबकि बिलासपुर में करीब 300 सीए प्रोफेशनल्स मौजूद हैं। जिसमे से लगभग 150 सीए पर्सनल प्रैक्टिस कर या फ्री लांस सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर काम कर रहे हैं। इसमें बेहतर स्कोप को देखते हुए वर्तमान में 10 लाख छात्र सीए बनने के लिए पढ़ाई कर रहे हैं।
सरकारी व निजी क्षेत्रों में सीए की बढ़ी पूछपरख
शहर के व्यापारियों के अनुसार जीएसटी के आने के बाद से तमाम तरह के उत्पादों पर लगने वाले टैक्स को एक में सम्मिलित किया गया है, जिसके चलते इसकी टेक्निकल चीजों पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो गया है। इसके चलते सीए की विशेष जरूरत पड़ रही है। ंपनी एक्ट के प्रावधानों के अनुसार सभी रजिस्टर्ड कंपनियों को उनके अकाउंट की ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट से कराना जरूरी होता है। इसलिए सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में सीए के लिए नौकरी के अवसर बढ़े हैं। कोर्स पूरा कर चुके छात्र स्वतंत्र प्रैक्टिस का विकल्प भी अपना सकते हैंं। जानरकारों के मुताबिक करीब 52 फीसदी सीए नौकरी के बजाय प्राइवेट प्रैक्टिस को चुनते हैं।
बड़ी संख्या में छात्र कॉमर्स विषय को चुन रहे
एक समय था जब ज्यादातर छात्र 1० वीं के बार साइंस या मैथ्स सब्जेक्ट का जयन करते थे, ताकि डॉक्टर, इंजीनियर बन सकें। वर्तमान में सीए के लिए बढ़ते स्कोप को देखते हुए अब ज्यादातर छात्र कॉमर्स को चुन रहे हैं। बिलासपुर में बीते सालों से चार से पांच गुना ज्यादा युवा सीए का कोर्स कर रहे हैं। सीए के इंटर्न की परीक्षा पास करने के लिए कोचिंग लेने वाले युवाओं की संख्या भी बढ़ी है।