मंदिर में पुजारी पंडित गोविंद प्रसाद पाड़ी के मार्गदर्शन में पूजन कार्यक्रम किया गया। मंदिर समिति के उपाध्यक्ष केके बेहरा ने बताया कि स्नान पूर्णिमा रथयात्रा से संबंधित विधि है। भगवान साल भर दर्पण में स्नान करते हैं। लेकिन स्नान पूर्णिमा में जल से स्नान कराया जाता है। इस वजह से महाप्रभु बीमार हो जाएंगे। इस विधि के बाद दिन भर पूजा-अर्चना होगी। इसके बाद शाम में महाआरती व भजन किया जाएगा। मंगलवार से मंदिर का पट बंद हो जाएगा।