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पर्युषण पर्व के प्रथम दिवस को जैन समाज ने खाद्य संयम के रूप में मनाया

चोपड़ा भवन में कल्पसूत्र का वाचन एवं भक्ति, जैन भवन टिकरापारा एवं वैशाली नगर में उपासिका बहनों द्वारा प्रवचन

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बिलासपुर. श्वेतांबर, स्थानकवासी, तेरापंथ जैन समाज के द्वारा परम पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व 2022 का शुभारंभ बुधवार को हुआ। पर्युषण पर्व के प्रथम दिन को खाद्य संयम दिवस के रूप में मनाया गया। पर्व के कार्यक्रम 24 अगस्त से 31 अगस्त तक अलग-अलग स्थानों में संपन्न हो रहा है जिसमें तारबाहर स्थित श्वेतांबर समाज के कार्यक्रम व्यापार विहार स्थित चोपड़ा भवन, गुजराती जैन स्थानकवासी का कार्यक्रम जैन भवन टिकरापारा एवं तेरापंथ समाज का कार्यक्रम वैशाली नगर निवासी हुल्लास चंद गोलछा के यहां संपन्न हो रहा है। सुबह-शाम सामायिक, प्रतिक्रमण, विशेष पूजा अर्चना एवं रात्रि में भक्ति भजन हो रहे। जैन समाज के प्रचार प्रसार प्रभारी अमरेश जैन ने बताया कि पर्युषण महापर्व के पहले दिन व्यापार विहार स्थित चोपड़ा भवन में पूजन वेशभूषा धारण कर पाठ कर शुद्धि का कार्य किया गया। विधि विधान से पूजा अर्चना कर भगवान जी को स्थापित की गई । पश्चात पक्षाल पूजा, प्रार्थना आरंभ हुई। सामूहिक जाप, दादा गुरुदेव इकतीसा का पाठ एवं अंत में विशेष आरती हुई । इसके पश्चात समाज की ज्योति चोपड़ा एवं प्रमिला चोपड़ा द्वारा कल्प सूत्र का वाचन किया गया। रात्रि में समाज के सदस्यों ने मिलजुल कर भक्ति, वंदना, स्तवन का गायन किया। धार्मिक संगीत संध्या संपन्न होगी जिसमें समाज के सदस्य सभी भक्ति में शामिल होंगे। चातुर्मास लगते ही जैन समाज के घरों में तप तपस्या का क्रम चालू हो जाता है जो कि पर्यूषण पर्व के दौरान उससे कई गुना ज्यादा तपस्वीओं की संख्या में बढ़ोतरी होती है। छोटे से लेकर बड़े तक अपनी शक्तिनुसार आहार, संयम का पालन कर अपने आत्म शुद्धि के लिए सरल एवं कठिन तप तपस्या करते हैं। इन आठ दिनों में हरी सब्जी, जमीकंद का त्याग, सूर्यास्त पश्चात भोजन का त्याग रहता है। इस अवसर पर संरक्षक विमल चोपड़ा, अध्यक्ष जैनेंद्र डाकलिया, नरेंद्र मेहता, इंदरचंद बैद, प्रवीण कोचर, संजीव चोपड़ा, रुपेश गोलछा, सुनीता जैन, अमित मेहता, संजय छाजेड़ एवं जैन सोशल एक्टिविटी ग्रुप, महिला महिला मंडल के सदस्य भी उपस्थित थे ।
जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज का पर्यूषण पर्व पर उपासिका बहनों द्वारा प्रवचन
वैशाली नगर में 24 अगस्त बुधवार से पर्युषण महापर्व के प्रथम दिवस खाद्य संयम दिवस के रूप में मनाया गया । इस अवसर पर बाहर से पधारी 2 उपासिका बहनें जिसमें प्रेमलता नाहर (अंकलेश्वर), पुष्पा पगारिया(सूरत) द्वारा धर्म आराधना की गई । पर्यूषण पर्व के सभी कार्यक्रम वैशाली नगर निवासी उल्लासचंद गोलछा के निवास पर संपन्न हो रहे । प्रतिदिन शाम को सामूहिक प्रतिक्रमण एवं सामायिक की जा रही है।
गुजराती जैन समाज का पर्यूषण पर्व
श्री दशा श्रीमाली स्थानकवासी जैन संघ अध्यक्ष भगवानदास भाई सुतारिया ने बताया कि पर्यूषण के प्रथम दिवस अहमदाबाद से पहुंची उपासिका बहनों द्वारा समाज के सदस्यों को आज का दिन का महत्व एवं और उनके बारे में बताया गया। यह पर्व 24 अगस्त से 31 अगस्त तक रहेगा। जैन दर्शन स्वाध्याय संघ अहमदाबाद से पधारी तीन बहनें हीना दोशी, रंजन शाह, प्रफु ल्ला शाह द्वारा प्रवचन एवं धर्म चर्चा की गई । पर्यूषण पर्व के प्रथम दिवस कार्यक्रम में सुबह 6:30 बजे प्रार्थना की गई। इसके पश्चात प्रवचन और दोपहर धर्म चर्चा एवं शाम को प्रतिक्रमण किया गया। अहमदाबाद से पधारी तीन बहनें हीना दोशी, रंजन शाह, प्रफुल्ला शाह द्वारा प्रवचन में समझाया धर्म कैसे होता है, धर्म कहा किया जाता है और धर्म क्यों किया जाता है, इस बारे में अपने व्याख्यान में बहुत ही विस्तार से उन्होंने बताया।धर्म कैसे होता है इस बारे में उन्होंने बताया कि धर्म एक दूसरे को देख कर किया जाता है । परिवार में बड़े यदि धर्म करते हैं तो बच्चे उन्हें देखकर सीखते हैं और पूरा परिवार धार्मिक बन जाता है वैसे ही समाज में एक दूसरे को देख कर धर्म किया जा सकता है, धर्म कहां किया जाता है इस बारे में बताते हुए कहा कि धर्म स्वच्छ व शांति स्थल पर किया जाता है। चाहे वह घर में ही क्यों ना हो स्वच्छता की ओर ध्यान ज्यादा रखना चाहिए। मंदिर में भी किया जा सकता है धर्म, धर्म क्यों करते हैं तो अपनी आत्मा को परमात्मा से मिलाने के लिए धर्म किया जाता है जितना धर्म आप करेंगे उतना ज्यादा पुण्य अर्जित करेंगे मनुष्य मरने के बाद किए हुए धर्म को ही ले जा सकता है । धन-दौलत संपत्ति सब यहीं छूट जाती है । मोहमाया का त्याग कर धर्म किया जाता है । जो व्यक्ति धर्म करता है वह मोक्ष को प्राप्त करता है। समाज के 28 श्रावक श्राविकाओं ने एकासणा तप किया । तत्पश्चात रेलवे परिक्षेत्र में भूखे को भोजन कराया गया और इस तरह पर्युषण महापर्व कीशुरुआत की गई।प्रवचन में समाज के अध्यक्ष भगवानदास भाई सुतारिया, कीर्ति सुतारिया, राजू तेजाणी, जितेंद्र गांधी, केतन सुतारिया, प्रवीण दमाणी, गोपाल वेलाणी, लता देसाई, छाया देसाई, पारुल सुतारिया, देवीला सुतारिया, शर्मिला तेजाणी, रमिला पटेल, संगीता दमानी, उर्मिला तेजाणी सहित समाज के लोग उपस्थित थे।