
बिलासपुर. दयालबंद स्थित खंडूजा अस्पताल भी भगवान भरोसे संचालित हो रहा है। अस्पताल की तीसरी मंजिल स्थित वार्ड में शुक्रवार दो महिलाओं पर हमला हो गया और आरोपी युवक ने खुद फांसी लगा ली। लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों को इस घटना की भनक तक नहीं लगी। सिम्स में भर्ती गंभीर सुभद्रा के बेटा अविनाश ने इसे अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही मानते हुए मामले की जांच करने की मांग की है। वहीं सीएमओ कार्यालय के नोडल अधिकारी ने इसकी जांच कराने की बात कही है।
सीपत क्षेत्र के ग्राम पोड़ी निवासी रमेश कुमार मानिकपुरी 35 वर्ष राजमिस्त्री का काम करता था। कुछ दिन पहले तक वह अपनी पत्नी कुसुमलता मानिकपुरी 3२ वर्ष व उसकी बड़ी बहन सुभद्रा के परिवार के साथ तिफरा में किराए के मकान में रहता था। करीब पांच दिन पहले उसकी पत्नी कुसुमलता सीढ़ी से गिर गई। इस पर उसे इलाज के लिए खंडूजा अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल की तीसरी मंजिल स्थित जनरल वार्ड में उसका इलाज चल रहा था। यहां कुसुमलता की बड़ी बहन सुभद्रा उसकी देखरेख कर रही थी। शुक्रवार की रात रमेश अस्पताल में था। रात में उसने पत्नी पर ड्रिप चढ़ाने वाले स्टैंड से हमला कर दिया। इससे खून से लथपथ घायल कुसुमलता की मौत हो गई। वहीं उसकी बड़ी बहन सुभद्रा पर भी जानलेवा हमला किया और वह खून से लथपथ होकर बेहोश हो गई। इस घटना के बाद रमेश ने साड़ी का फंदा बनाकर अस्पताल में ही फांसी पर झूल गया। शनिवार की सुबह करीब 8 बजे अस्पताल के कर्मचारी तीसरी मंजिल पर पहुंचे तो नजारा देखकर हैरान रह गए। खून से लथपथ महिला सुभद्रा छटपटा रही थी। वहीं कुसुमलता की मौत हो गई थी और रमेश की लाश फंदे पर लटक रही थी। इस घटना की सूचना अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को दी। गंभीर रुप से घायल सुभद्रा को पुलिस ने इलाज के लिए सिम्स में भर्ती कराया। सुभद्रा के बेटा अविनाश का कहना है। मेरी मां रातभर सिढ़ी में पड़ी रही। अगर स्टाफ होते तो तुरंत उसका उपचार की व्यवस्था होता। लेकिन कोई स्टाफ देखने तक नहीं आया वार्ड में मरीज भर्ती है तो रात में मरीज की हालत जानने के लिए वार्ड में आते तो मेरी की हालत का पता चलता। अविनाश ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मामले की जांच की मांग की है उनका कहना है इस घटना के लिए काफी हद तक अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ भी जिम्मेदार है। जब रमेश ने अपनी पत्नी के साथ मारपीट किया और डेढ़ सास सुभद्रा को मारा तो चिख पुकार मची होगी। अविनाश का कहना है कि रातभर मेरी मां सीढ़ी में पड़ी रही लेकिन स्टाफ का अता पता नहीं था।
बड़ी लापरवाही सामने आई: ऐसे में सवाल उठता है कि अस्पताल में भर्ती मरीज को कर्मचारी व नर्स रात में देखने भी नहीं जाते। अगर नर्स व कर्मचारी मरीज का हाल जानने के लिए ऊपर जाते तो रात में ही इस घटना की जानकारी मिल जाती। सवाल यह भी है कि वारदात के समय रात में ड्यूटी करने वाले नर्स व कर्मचारी कहां थे। अगर अस्पताल में थे तो उन्हें हमले व खुदकुशी की भनक क्यों नहीं लगी। रमेश ने हमला किया तो चीख पुकार मचाई होगी।
सुभद्रा की स्थित गंभीर: रमेश के हमले से घायल हुई उसकी डेढ़ सास का सिम्स में उपचार चल रहा है। उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है। डॉक्टर के अनुसार उसकी स्थित गंभीर बनी हुई है। इस कारण पुलिस उसका बयानदर्ज नहीं कर पाई है।
मरीज अस्पताल में भर्ती है और अस्पताल के प्रबंधन व स्टाफ को पता नहीं चल पाना गंभीर लापरवाही है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। कि रात स्टाफ थे कि नहीं थे तो उन्हे पता कैसे नहीं चला।
सुजय मुखर्जी, नोडल अधिकारी सीएमएचओ कार्यालय
Published on:
03 Oct 2017 12:18 pm
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