
अब जानवरों को भी सताने लगी मोटापे की चिंता, बीमारियों के डर से शेर-बाघ-चीता कर रहे है डाइट, मिलन करने में हो रहीं परेशानियां
बिलासपुर. रहन-सहन खान-पान में असामान्यता के चलते एक तरफ जहां देश में मोटापे के दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। वहीं इससे देश के जानवर भी अछूते नहीं हैं। विभिन्न जू के पिंजरों में कैद जानवरों को खाना तो भरपूर दिया जा रहा है लेकिन जानवरों को चहल कदमी करने जंगल नहीं हैं, ऐसे में जानवरों में भी चर्बी बढ़ रही है। मोटापा से जानवरों में कई बीमारियां घर कर रहीं हैं।
कानन पेंडारी के लायन, तेंदुआ, सफेद शेर ,रायल बंगाल टाइगर सहित अन्य छोटे-बड़े जानवरों का वजन लगातार बढ़ रहा है। बढ़ते वजन ने न केवल इन जानवरों को कई दिक्कतें पैदा हो रही हैं बल्कि जू प्रबंधन भी रास्ता निकाल रहा है। प्रबंधन द्वारा वन्य प्राणियों के वजट घटाने के लिए डाइट कम किया जा रहा है। लायन, तेंदुआ,सफेद शेर ,रायल बंगाल टाइगर व अन्य वन्य प्राणियों को डेढ़ से दो किलो कम मांस दिया जा है। मोटापा बढऩे से ये केज के अन्दर- बाहर सोते ही नजर आते हैं।
कानन पेंडारी में छोटे-बड़े जानवर 32 मांसाहारी हैं। इनको प्रतिदिन 10 किलो या इससे अधिक मांस दिया जाता है जबकि लगभग दर्जन छोटे जानवरों को मछली और मुर्गी का मांस दिया जाता है, जिनका प्रतिदिन का डाइट आधा किलो १ पाव का है। मोटापे को लेकर जो समस्या आ रही है, वह बड़े जानवरों में ज्यादा आ रही है। ठंड होने की वजह से जानवरों की डाइट डेढ़ से दो किलो बढ़कर गया था। जानवर डटकर मांस खाते थे। गुनगुनी धूप में या अपने केज में जाते थे। जिसके कारण केज में चलते कम बैठे ज्यादा नजर आते थे। पिछले दिनों जानवरों के वजन का आंकलन किया गया तो सभी जानवरों के वजन अधिक पाया गया। इन जानवरों के शरीर देखकर स्पष्ट नजर आ रहा है कि इनका मोटापा बढ़ गया है। इसलिए पिछले चार दिनों से सभी मांसाहारी जानवरों के डाइट को घटा दिया गया है। कानन पेंडारी के वन्य प्राणियों के चिकित्सक डॉ. पी के चंदन ने बताया कि सभी बड़े जानवरों का डाइट डेढ़ से दो किलो कम कर दिया गया है। वजन बढऩे के कारण जानवरों सुस्त हो गए हैं। केज में चहल पहल नहीं करते हैं। दिन भर बैठे रहते हैं या फिर सोते पाए पाते हैं। इनके शरीर की सुस्ती कम करने के लिए डाइट कम की गयी है।
पर्यटकों को नहीं होता शेर का दीदार
कानन पेंडारी मांसाहारी-शाकाहारी मिलाकर जानवरों की 65 प्रकार की प्रजाति है पर्यटक सभी को देखने जाते हैं लेकिन ज्यादा डिमांड शेर का रहता है। शेर पेड़ के नीचे दिन भर सोए रहते हैं , जिसके कारण पर्यटक शेर का दीदार नहीं कर पाते हैं। यही हाल तेंदुआ का है, दिन भर अपने मचान में सोया रहता है। दिन भर सोने के कारण दहाडऩा भी कम कर दिया है।
स्वास्थ्य सुधार में लगेगा 15 दिन: जानवरों के वजन बढऩे से बीमारी भी बढ़ती है। इस समय बदहजमी की ज्यादा शिकायत मिल रही थी। इनके हजमा सही होने के लिए कम से 15 दिन का समय लगेगा। कुछ में अपचन की शिकायत अभी भी है। कानन प्रबंधन का कहना है कि एेसा पहली बार हुआ है।
जानवरों की डाइट
1. लायन - 13 डाइट 10 किलो
2. तेंदुआ - 6 डाइट 10 किलो
3. सफेद शेर -3 डाइट 10 से 12
4. रायल बंगाल - 10 डाइट 10 से 11 कि.
किया गया बदलाव
बकरे का मटन हार्ड होता है इसलिए बुधवार को सभी जानवरों को चिकन दिया जाता है। एक दिन सुअर, ४ दिन मटन, रविवार को खाली पेट रखा जाता है ताकि अपचन न हो।
जानवरों की चहल कदमी कम हो गयी
कानन पेंडारी में 15 साल पहले लायन,तेंदुआ,सफेद शेर,रायल बंगाल टाइगर की संख्या एक दो या तीन था। प्रतिदिन वन्य प्राणियों को अलग-अलग समय में केज में छोड़ा जाता था। जिसके कारण वे उछल कूद कर लेते थे लेकिन बड़े जानवर काफी बढ़ गए हैं। जिसके कारण प्रतिदिन उनको केज से बाहर निकालते नहीं बन पा रहा है। लायन की संख्या 13 है एक जानवर को एक ही केज में छोड़ा जाता है। बाकी दिन 10 बाई 10 के कमरे के अन्दर बैठे रहते हैं।
केज नहीं बढ़ा रहे हैं
कानन पेंडारी प्रबंधन को सीजेडए द्वारा मांसाहारी जानवरों के केज की साइज बढ़ाने का निर्देश कई बार दिया जा चुका है। लेकिन प्रबंधन की मनमानी के कारण इस काम शुरु नहीं हो पाया है। तेंदुआ सहित अन्य जानवरों के केज काफी पुराने हंै। कई जगह से जंग लग गया है। जिसे बदला नहीं जा रहा है।
जानवरों का मोटापा बढऩे के कारण सभी मांसाहारी जानवरों का डाइट डेढ़ से दो किलो कम किया गया है। मोटापा अधिक होने के कारण सुस्त बैठे रहते हैं। इसके कारण ब्रीडिंग में भी बड़ी समस्या आ रही है। पेट भर खाने से अनेक बीमारियां भी हो सकती है। डाइट कम करने का असर 15 से 20 दिन में पता चल जाएगा।
डॉ. पी के चंदन ,चिकित्सक वन्य प्राणी कानन पेंडारी
Published on:
20 Feb 2019 12:11 pm

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