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लोगों पर 3 गुना जलकर लादने के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था

साढ़े पांच करोड़ का राजस्व प्राप्त होना चाहिए लेकिन वसूली में फिसड्डी होने की वजह से निगम को महज ढाई करोड़ रुपए ही जलकर के रूप में प्राप्त हो रहा है।

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pani tanki

बिलासपुर . निगम प्रशासन की लचर व्यवस्था के चलते जल उपभोक्ताओं पर तीन गुना से अधिक जल कर लादने के बाद भी नगर निगम में जलप्रदाय से आय और व्यय में असमानता दूर नहीं हो सकी। अभी भी आय और व्यय में लगभग 10 करोड़ का अंतर बना हुआ है, वहीं वसूली में कोताही बरतने की वजह से साढ़े पांच करोड़ की बिलिंग में से महज 2.50 करोड़ की ही वसूली हो पा रही है। निगम प्रशासन 25 पानी टंकियों और 450 पंप हाउसों से शहर के जलउपभोक्ताओं को पाइप लाइन के माध्यम से रोजाना 50 एमएलडी जलप्रदाय करता है। निगम में दर्ज रिकार्ड की मानें तो शहर सीमा में लगभग 40 हजार जलउपभोक्ता हैं। जिनसे निगम को साढ़े पांच करोड़ का राजस्व प्राप्त होना चाहिए लेकिन वसूली में फिसड्डी होने की वजह से निगम को महज ढाई करोड़ रुपए ही जलकर के रूप में प्राप्त हो रहा है। राज्य शासन ने निगम प्रशासनों को राहत देने के लिए सन् 2012-13 में जलकर की राशि को 50 रुपए से बढ़ाकर सीधे 200 रुपए प्रतिमाह कर दिया, इसके अलावा व्यवसायिक कनेक्शनों की दर में भी वृद्धि की लेकिन इसके बाद भी लचर व्यवस्था के चलते आय और व्यय की असमानता को दूर नहीं किया जा सका।
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शासकीय योजना के आवासों में जलसंकट : नगर निगम सीमा से बाहर आईएचएडीपी योजना के निर्मित मकानों में निगम प्रशासन द्वारा शहर को झुग्गी मुक्त करने की योजना के तहत झुग्गियों को हटाकर वहां के रहवासियों को सरकारी आवासों में आवास आबंटित किया गया है। आईएचएडीपी योजना के तहत निर्मित सकरी, खमतराई, बहतराई, कोनी, देवरीखुर्द समेत लगभग सभी जगह जलसंकट की स्थिति है बताया जाता है कि यहां ठेकेदार द्वारा निर्माण के दौरान क्यूरिंग के लिए कराए गए बोर से जलापूर्ति की जा रही है निगम ने यहां के रहवासियों के लिए अतिरिक्त बोर ही नहीं कराया है। इन आवासों की पूरी आबादी ठेकेदार द्वारा क्यूरिंग के लिए कराए गए बोर पर ही आश्रित है।
ये हैं खर्चे : निगम को जलप्रदाय व्यवस्था बनाने के लिए हर साल जीआई फिटिंग, सीआई फिटिंग, पंप साकेट, कंट्रोल पेनल, हैंडपंप लगाने, स्टार्टर, असेम्बली खरीदने, पंप श्रमिकों के वेतन, और रेग्युलर स्टाफ तथा बिजली बिल की अदायगी में 15.50 करोड़ रुपए का खर्च होता है। जो आंकड़ों की दृष्टि से एक बड़ी रकम होती है। वसूली नहीं होने का असर काम पर भी पड़ता है।
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ये हंै दिक्कतें : निगम प्रशासन नगर निगम सीमा क्षेत्र से लगे कॉलोनियों राजकिशोर नगर, यदुनंदन नगर के अलावा सकरी, बहतराई, खमतराई, कोनी, देवरीखुर्द, मिनोचा कॉलोनी समेत अन्य कॉलोनियों और सरकारी योजना के आवासों में भी जलापूर्ति की व्यवस्था करता है। यहां जलप्रदाय में खर्च तो निगम को करना पड़ रहा है। लेकिन यहां से जलकर की प्राप्ति नहीं होती। यह भी एक वजह है।
बिजली बिल का साढ़े 10 करोड़ बकाया : निगम प्रशासन ने जलप्रदाय करने जलापूर्ति के लिए टंकियों और पंप हाउसों में अलग-अलग कनेक्शन ले रखा है, जिसके बिजली का बिल लगभग 10 करोड़ 50 लाख रुपए तक पहुंच गया है। फंड के टोंटे के कारण निगम प्रशासन पिछले कई माह से बिल ही अदा नहीं कर पा रहा है।
फैक्ट फाइल : शहर में मकानों की संख्या - 60000। जल उपभोक्ताओं की संख्या - 40000। अवैध नल कनेक्शनधारी - 10 से 15 हजार। 25 टंकियों और साढ़े चार सौ पंपों से किया जा रहा- 50 एमएलडी जलप्रदाय। निगम सीमा से बाहर दर्जन भर कॉलोनियों से नहीं मिलता- कोई जलकर।
व्यवस्था नहीं सुधर रही है : जलप्रदाय व्यवस्था में आय और व्यय में लगभग साढ़े दस करोड़ का बड़ा अंतर है, इसके कई कारण हैं, निगम सीमा से लगी ज्यादातर कॉलोनियों से निगम को जलकर ही नहीं मिलता। यही वजह है कि जलकर में तीन गुना बढ़ोतरी के बाद भी व्यवस्था नहीं सुधर पा रही है।
अजय श्रीवासन,सहायक यंत्री जलकार्य विभाग नगर निगम