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दिल्ली में चुनाव आयोग ने किया संसदीय सचिवों के भाग्य का फैसला, छत्तीसगढ़ में मामला लंबित

आप के 20 विधायकों को अयोग्य ठहराने की सिफारिश के बाद सभी नजरें छत्तीसगढ़ की ओर है। हालांकि, छत्तीसगढ़ के संसदीय सचिवों का मामला हाईकोर्ट में लंबित है।

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Chhattisgarh High Court

दिल्ली में चुनाव आयोग ने किया संसदीय सचिवों के भाग्य का फैसला, छत्तीसगढ़ में मामला लंबित

बिलासपुर . दिल्ली में चुनाव आयोग ने संसदीय सचिवों के भाग्य का फैसला कर दिया है। आप के 20 विधायकों को अयोग्य ठहराने की सिफारिश राष्ट्रपति से की गई है। वहीं छत्तीसगढ़ के 11 संसदीय सचिवों का मामला हाईकोर्ट में 2 साल से लंबित है, फैसला कभी भी आ सकता है। हालांकि हाईकोर्ट ने संसदीय सचिवों की नियुक्ति को असंवैधानिक मानते हुए राज्य शासन से जवाब तलब किया है। लेकिन राज्य सरकार पिछले डेढ़ वर्षों से जवाब देने में आनाकानी कर रही है। इस रवैये को देखते हुए कोर्ट ने सचिवों के सभी वित्तीय अधिकार (अनुदान आदि) सीज कर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। हालांकि मामले में अंतिम आदेश आना बाकी है।

कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने भी लगाई याचिका
इस मामले को लेकर कवर्धा के पूर्व विधायक मो. अकबर की ओर से भी रिट् याचिका लगाई गई, जिसमें संसदीय सचिवों की नियुक्ति की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए इसे रद्द किए जाने की मांग की गई। तत्कालीन सीजे गुप्ता ने हमर संगवारी एवं अकबर की याचिका को एक प्रवृत्ति का मानते हुए जनहित याचिका में मर्ज कर एक साथ सुनवाई शुरू की। राज्य शासन, सीएम एवं मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर अंतिम रूप से जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए थे।

क्यों छिड़ी है संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर बहस
संसदीय सचिवों की नियुक्ति का मामला कोई नया नहीं है, ना ही किसी एक प्रदेश से संबंधित है। देश के सभी प्रांत की सरकारें जिन विधान सभा सदस्यों को मंत्री या लाभ का पद नहीं दे पातीं। उन्हें उपकृत करने के लिए संसदीय सचिव के पद से नवाजा जाता है। छत्तीसगढ़ में हमर संगवारी के कार्यकर्ता राकेश चौबे ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर शासन द्वारा 11 संसदीय सचिवों के नियुक्ति की वैधानिकता पर सवाल उठाए थे।

याचिका में कहा गया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत के उक्त पद का कोई प्रावधान ही नहीं है। इसके बाद भी राज्य शासन द्वारा नए पद का स़ृजन किया गया और अपने लोगों को उपकृत कर लाभ पहुंचाया गया, ये अनुचित है। इसलिए सभी नियुक्तियां रद्द की जाए। हाईकोर्ट के तत्कालीन सीजे दीपक गुप्ता ने 13 फरवरी 2017 को राज्य शासन, सीएम एवं मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। लेकिन शासन की ओर से आज तक इस मामले में किसी प्रकार का जवाब नहीं दिया गया।

इनकी नियुक्ति पर लटक रही तलवार
चुनाव आयोग के निर्णय के बाद जिन संसदीय सचिवों पर तलवार लटक रही है, उनमें प्रदेश के 11 संसदीय सचिव शामिल हैं। इनमें अंबेश जांगड़े, लालचंद बाफना, लखन देवांगन, मोतीराम चंद्रवंशी, रूपकुमारी चौधरी, शिवशंकर पैकरा, सुनीति सत्यानंद राठिया, तोखन साहू, राजू सिंह क्षत्री, चंपादेवी पावले और गोवर्धन मांझी शामिल हैं।

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