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बुजुर्गों के साथ पत्रिका परिवार ने मनाई खुशियों की दिवाली, बीते दिनों को याद करते ही आंखें हुईं नम

इस दौरान सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं बल्कि पूरी टीम ने खुशी महसूस की। यहां पर 30 पुरुष व 29 महिलाएं रह रही है।

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Patrika diwali

बिलासपुर. पत्रिका परिवार ने अनूठी पहल करते हुए मंगलवार को पुलिस लाइन स्थित कल्याणकुंज वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के बीच पहुंचकर दिवाली की खुशियां मनाई। अपनों से दूर रहने वाले बुजुर्गों के पास बैठकर पत्रिका की टीम ने न सिर्फ मिठाई व फल बांटे, बल्कि उनका हाल-चाल जाना और सदैव सहयोग की बात कही। त्योहार के दिन एक साथ इतने लोगों को देखकर बुजुर्गों के आंखों में आंसू आ गए। सभी ने स्नेह भाव से बातें करते हुए त्योहार मनाया। मंगलवार को पत्रिका बिलासपुर की टीम ने स्थानीय संपादक बरुण श्रीवास्वत व जीएम दिनेश जैन के नेतृत्व में एक नई पहल करते हुए कल्याणकुंज आश्रम में रहने वाले वृद्धजनों से मिलने पहुंची। त्योहार तो हम हर बार अपनों के बीच मनाते है लेकिन इस बार कुछ नया करने के उद्देश्य से पूरी टीम अपनों से दूर रहने वाले बुजुर्गों से मिलकर त्योहार की बधाई दी। साथ ही साथ सभी से बात करते हुए उनके सुख-दुख जाने। इस दौरान सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं बल्कि पूरी टीम ने खुशी महसूस की। यहां पर 30 पुरुष व 29 महिलाएं रह रही है। सभी ने अपनी दिनचर्या बताई व अपने अनुभव बांटे।
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हर रोज कोई न कोई आता है : वृद्धाश्रम के व्यवस्थापक ईशनारायण शर्मा ने वृद्धाश्रम के विषय में विस्तार से बातें कीं। उन्होंने कहा कि पत्रिका की टीम हम सभी से मिलने पहुंची बहुत अच्छा लगा। यहां रहने वाले लोगों की परिस्थितियां अलग- अलग हैं। लेकिन एक साथ रहते हुए सभी खुश हैं। सिर्फ शहर या प्रदेश के नहीं, बल्कि अन्य राज्य जैसे पंजाब, दिल्ली, बिहार व मध्यप्रदेश के लोग भी यहां रह रहे हैं।
त्योहार में खास होने का हुआ एहसास : वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों ने पूरी टीम को एक साथ देखकर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वैसे तो हमसे मिलने के लिए लोग आते रहते हैं, लेकिन त्योहार के दिन एक साथ इतने सारे लोगों से मिलकर बहुत अच्छा लगा। खास होने का एहसास कराया गया। व्यस्तता के बाद भी पूरी टीम ने समय दिया जो हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
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घर जैसा लगता है अब तो हमें : वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग नंदकिशोर शर्मा ने बताया कि मैं मुख्य रूप से बिहार पटना का रहने वाला हूं। इस वृद्धाश्रम में पिछले चार साल से रह रहा हूं। यहां आने के बाद मुझे घर की याद नहीं आती है, क्योंकि यहां रहने वाले लोग बहुत अच्छे हैं। सभी मिल जुलकर रहते हैं।
हर जरूरत हो रही पूरी : अपनों ने जरूर छोड़ दिया है लेकिन शहर में बहुत से सेवा कार्य करने वाले लोग हैं जो वृद्धजनों की सहायता करते हैं। व्यवस्थापक ने बताया, वाटर कूलर हो या सौर ऊर्जा वाला पानी गर्म करने वाला वाटर गीजर हर कुछ किसी न किसी के सहयोग से मिला है। इसके अलावा खाद्यान्न, मिष्ठान सहित कई जरूरत की सामग्री समाज सेवी संस्था व सेवा कार्य करने वाले लोग देकर जाते हैं।
एेसे गुजरता है इनका पूरा दिन : वृद्धजनों के लिए कल्याणकुंज आश्रम में एक दिनचर्या तय की गई है। उसी के अनुसार इनके दिन की शुरुआत होती है। सुबह सात बजे राष्ट्रगीत गाते हुए सुबह की शुरुआत करते हैं। इसके बाद साढ़े सात बजे चाय नास्ता दिया जाता है। इसके बाद साढ़े 10 बजे तक भोजन कर सभी आराम करते व टीवी देखते हैं। दोपहर साढ़े तीन बजे चाय नाश्ता व शाम साढ़े छह बजे प्रार्थना व आरती, सात बजे भोजन व रात साढ़े सात बजे से भजन व रामायण पाठ किया जाता है।

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