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मंदी के दौर से नहीं उबर पा रहा रियल स्टेट, लक्ष्य पाना मुश्किल

अगले चार माह में 124 करोड़ रुपए का लक्ष्य पूरा करना नामुमकिन लग रहा है।

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मंदी के दौर से नहीं उबर पा रहा रियल स्टेट, लक्ष्य पाना मुश्किल

बिलासपुर. जिला मुख्यालय का उप पंजीयक दफ्तर मुख्यतारनामा, वसीयतनामा एवं नजूल पट्टा नवीनीकरण तक ही सिमट कर रह गया है। रियल स्टेट का कारोबार अभी भी मंदी के दौर से नहीं उबर पाया है। आठ माह में जमीन की खरीदी -बिक्री के पंजीयन से सिर्फ 7 .9 करोड़ की आय हुई है। अगले चार माह में 124 करोड़ रुपए का लक्ष्य पूरा करना नामुमकिन लग रहा है।

पुराना कंपोजिट बिल्डिंग में जिला मुख्यालय का उप पंजीयक कार्यालय इन दिनों जमीन की रजिस्ट्री की रफ्तार धीमी होने से एक तरह से सन्नाटा छाया हुआ है। इस दफ्तर में खरीदी-बिक्री का पंजीयन कराने वाले लोगों की आमदरफ्त नहीं के बराबर होने से आय पर सबसे अधिक असर पड़ा है। जिला मुख्यालय के उप पंजीयन कार्यालय में जमीन की खरीदी-बिक्री के स्थान पर नवीनीकरण के मामले अधिक हो रहे है। इसमें नजूल पट्टा ,सामान्य पट्टा की जमीन का नवीनीकरण हो रहा है। इसी प्रकार वसीयतनामा, मुख्यतारनामा के पंजीयन अधिक हो रहे है।

इस वजह से कमी आई खरीदी और बिक्री में : जमीन की खरीदी-बिक्री में कई वजह से आय में कमी प्रमुख वजह बनी है। इनमें नोटबंदी के बाद से आय में कमी एकदम से बंद हो गई थी। उस स्थिति से रियल स्टेट कारोबार अब तक ऊबर नहीं पाया है। बिलासपुर शहर का मास्टर प्लान लागू होने में विलंब, रेरा की प्रक्रिया जटिल होने से रियल एस्टेट के कारोबारियों का पंजीयन नहीं के बराबर हुआ। इसके बाद ऑनलाइन इंट्री में विलंब ,चार माह तक नजूल पट्टे के नवीनीकरण का ऑनलाइन फार्मेंट राज्य स्तर पर तैयार होने में लग गए । इसका सीधा असर रजिस्ट्री पर पड़ रहा है।
अप्रैल से अक्टूबर तक उप पंजीयन की आय : वित्तीय वर्ष प्रारंभ होने से लेकर अक्टूबर माह तक जिला मुख्यालय के उप पंजीयन विभाग की आय काफी कम हुई है। जानकारी के अनुसार एक अपै्रल से अक्टूबर माह तक 7 करोड़ 9 लाख 31 हजार 136 रुपए की आय हुई है। इस दौरान 816 दस्तावेज पंजीकृत किए गए। पिछले साल से यह आय लगभग 1.15 करोड़ रुपए की कम आय हुई है। साथ ही 125 दस्तावेजों का कम पंजीयन हुआ है।