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गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड्स में बिलासपुर का श्रीवास्तव परिवार

16 सालों से लगातार घर पर फहरा रहे हैं तिरंगा

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Srivastava family of Bilaspur in the Golden Book of World Records

गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकाड्र्स में बिलासपुर का श्रीवास्तव परिवार

बिलासपुर. अपने घर में सपरिवार 1६ साल से राष्ट्रध्वज तिरंगा फ हराने पर बिलासपुर निवासी केके श्रीवास्तव का नाम गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकाड्र्स में दर्ज किया गया है। बुक में नाम दर्ज होने की जानकारी संवाददाता सोनल राजेश शर्मा ने जारी की है। केके श्रीवास्तव उनकी पत्नी नीरजा श्रीवास्तव व तीनों बच्चों ने 28 जनवरी 2002 से अपने घर में झंडा फ हराना शुरू किया था। श्रीवास्तव परिवार रोजाना झंडा फ हराते हैं और शाम होते ही उसे सम्मानपूर्वक उतारते भी हैं। राष्ट्रीय ध्वज का अपमान न हो इसका भी श्रीवास्तव परिवार पूरा ख्याल रखता है। गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकाड्र्स में नाम दर्ज होने के बाद से ही पूरे परिवार में हर्ष है और वह खुद को गौरवांवित महसूस कर रहे है।एशिया की प्रथम तकनीकी संस्थान से गौरव मंडित आदर्श औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था कोनी के प्रशिक्षण अधीक्षक केके श्रीवास्तव, शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सेंदरी की प्राचार्य नीरजा श्रीवास्तव एवं उनके तीन बच्चों ने २६ जनवरी २००२ से अपने निवास पर तिरंगा फहराना शुरु किया था, जो तक अनवरत जारी है।
सर्वोच्च न्यायालय ने दिया है अधिकार:
बताया गया कि आजादी के ५५ वर्षों बाद तक तिरंगा फहराना स्टेटस सिम्बॉल माना जाता था, सर्वोच्च न्यायालय ने इस मौलिक अधिकार की संज्ञा से नवाजा है। उद्योगपति नवीन जिंदल की एक जनहित याचिका पर यह निर्णय दिया कि कोई भी भारतीय नागरिक कुछ सेवा शर्तों के साथ अपने निवास पर भी प्रतिदिन राष्ट्र ध्वज तिरंगा २६ जनवरी २००२ से फहरा सकता है। इस निर्णय के पूर्व केवल स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र आदि दिवस पर फहराया जाता था। अन्य दिवस पर तिरंगा फहराना अपराध की श्रेणी में माना जाता था। श्रीवास्तव परिवार ने २६ जनवरी २००२ को द्वितीय विश्व युद्ध में घायल, अपंग एवं मानसिक रुप से विकलांग सैनिकों के पुनर्वास हेतू बनाई गई बैरकों में जहां पर आईटीआई संचालित हो रही है, फहराना शुरु किया। सुबह सपरिवार राष्ट्रध्वज तिरंगा राष्ट्रगान गाकर फहराते थे और शाम को पुन: सपरिवार पूरे सम्मान के साथ तिरंगे का उतारते थे।
बड़े हो गए बच्चे, लेकिन यादें ताजा:
केके श्रीवास्तव ने बताया कि उस समय हमारी बड़ी बेटी श्वेता कक्षा आठवीं, छोटी बेटी नीलम पांचवी तथा बेटा प्रखर कच्ची पहली में पढ़ता था। आज श्वेता डॉक्टर श्वेता हैं, नीलम बीआईटी से बीई कम्प्युटर साइंस, सीएटी सिलेक्ट होकर आईएमआई दिल्ली से एमबीए करके इंटरनेशनल कंपनी में एचआर हेड हैं और उनका बेटा प्रखर आईआईटी गुवाहाटी असम में बीटेक तृतीय वर्ष में अध्ययनरत हैं।
ये सम्मान देशवासियों को समर्पित:
केके श्रीवास्तव ने बताया कि शुरु-शुरू में यह डर जरुर लगता था कि कहीं झंडा फहराना-उतारना न भूल जाएं लेकिन पत्नि और तीनों बच्चों ने हमेशा सहयोग किया। दिया गया सम्मान उन्होंने देशावासियों को समर्पित किया है।