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प्रार्थना व ध्यान से करें योग की शुरुआत, मन होगा शांत और बढ़ जाएंगे फायदे-मंजू दीदी

ब्रह्माकुमारीज टिकरापारा में चल रहे योग प्रशिक्षण एवं अभ्यास शिविर में शुक्रवार को आसनों के फायदे बताते हुए ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कहा कि योग की शुरुआत हम प्रार्थना से करते हैं जिससे मन शान्त और सकारात्मक हो जाता है। इससे योग के फायदे बढ़ जाते हैं।

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Start yoga with prayer and meditation, mind will be calm and benefits will increase - Manju Didi

Start yoga with prayer and meditation, mind will be calm and benefits will increase - Manju Didi

बिलासपुर. ब्रह्माकुमारीज टिकरापारा में चल रहे योग प्रशिक्षण एवं अभ्यास शिविर में शुक्रवार को आसनों के फायदे बताते हुए ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कहा कि योग की शुरुआत हम प्रार्थना से करते हैं जिससे मन शान्त और सकारात्मक हो जाता है। इससे योग के फायदे बढ़ जाते हैं।
21 जून के अभ्यास क्रम के प्रथम चरण में चालन व शिथिलिकरण का अभ्यास किया जाता है जिसमें गर्दन, कंधे, कमर व घुटने के लिए ग्रीवा चालन, स्कन्ध संचालन, कटि चालन व घुटना संचालन शामिल है।
इसके पश्चात् योगासन में खड़े होकर किए जाने वाले अभ्यास करते हैं। शरीर को सुदृढ़ व एक निश्चित उम्र तक कद बढ़ाने के लिए ताड़ासन, शरीर के संतुलन पैरों की मांसपेशियों को सुदृढ़ बनाने के लिए वृक्षासन, मेरूदण्ड को लचीला बनाने व भूख बढ़ाने के लिए पादहस्तासन, मेरूदण्ड की नाडिय़ों को सुदृढ़ बनाने व श्वसन क्षमता बढ़ाने के लिए अर्धचक्रासन व त्रिकोणासन का अभ्यास कराया गया। बैठकर किए जाने वाले अभ्यासों में भद्रासन, वज्रासन, अर्ध उष्ट्रासन, पूर्ण उष्ट्रासन, शशकासन, उत्तान मण्डूकासन व वक्रासन का अभ्यास कराया गया। इनसे गर्दन, पीठ, कमर, जांघ व उदर से संबंधित लाभ प्राप्त होते हैं। पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसनों में पीठ की समस्याओं, तनाव व चिंता दूर करने के लिए मकरासन, भुजंगासन व शलभासन सिखाया गया। इसी तरह पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले आसन भी कराये गए। इसमें सेतुबंधासन, उत्तानपादासन, अर्ध हलासन, पवन मुक्तासन व शवासन शामिल रहे। आसनों के बाद दीदी ने प्राणायाम का अभ्यास और संकल्प कराया कि अपने मन को संतुलित रखते हुए कर्तव्य निर्वाह, कुटुम्ब, कार्य, समाज व समूचे विश्व में शान्ति और सौहार्द के प्रसार के कृत संकल्प हूं।

मेडिटेशन को जीवन का बनाए अंग: बीके स्वाति दीदी
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में चल रहे 21 दिवसीय योगाभ्यास एवं प्रशिक्षण के आठवें दिन सेवाकेन्द्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने कहा कि आज जितनी दवाइयां और साधन तेजी से बढ़ रहे हैं उतनी ही तरह की बीमारियां बढ़ रही हंै। तन की अधिकतर बीमारियों का कारण मन है। मन यदि ठीक नहीं है तो मानव शरीर में बहुत कुछ बदल जाता है। इसलिए तन के साथ मन को ठीक रखने के लिए मेडिसिन के साथ मेडिटेशन को भी जीवन का अंग बनाना चाहिए। दीदी ने बताया कि राजयोग ध्यान एक अच्छी प्रक्रिया है जो मन को स्वस्थ रखती है। मन के अंदर इतनी शक्ति है कि दुनिया की हर चीज पर विजय प्राप्त करा सकता है, परंतु हमारा मन पर अधिकार होना चाहिए।
जितने अधिकार पूर्वक हम उसे आदेश करेंगे उतना ही वह हमारा कहना मानेगा। 21 दिवसीय योगाभ्यास एवं प्रशिक्षण के आठवें दिन में योगाचार्य रितु सिंह जी ने कहा कि हमारा शरीर पांच तत्वों (जल, पृथ्वी, आकाश, अग्नि और वायु) से मिलकर बना है। वात पित्त और कफ, शरीर का स्वास्थ्य इन तीन चीजों पर सबसे ज्यादा निर्भर करता है ।योगाचार्य रितु सिंह ने ग्रीवा चालन, स्कन्ध संचालन, ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्ध चक्रासन व त्रिकोणासन आदि योगासनो व प्राणायाम के अभ्यास कराते हुए इनके बारे में विस्तार से जानकारी दी।